बरेली: जनधन योजना में खुले 21 लाख खाते, 40 फीसदी बंद

बरेली, अमृत विचार। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर खुले खाते बैंकों के लिए सिर दर्द बनते जा रहे हैं। अब बैंक की तरफ से इसे बंद करना शुरू कर दिया गया हैं। जिले में 21 लाख खाते योजना के तहत खुले थे, लेकिन 40 फीसदी लोगों ने खातों से कोई लेनदेन ही …
बरेली, अमृत विचार। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर खुले खाते बैंकों के लिए सिर दर्द बनते जा रहे हैं। अब बैंक की तरफ से इसे बंद करना शुरू कर दिया गया हैं। जिले में 21 लाख खाते योजना के तहत खुले थे, लेकिन 40 फीसदी लोगों ने खातों से कोई लेनदेन ही नहीं किया। इनता ही नहीं किसी योजना का लाभ नहीं लेने और दोबारा बैंक नहीं जाने पर बैंकों ने ऐसे खातों को बंद कर दिया है।
साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनधन योजना की शुरुआत की थी। मकसद था कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बैंकों से जोड़ना। इसके तहत विभिन्न बैंकों में हर वर्ग के परिवारों के खाते जीरो बैलेंस पर खुलवाकर एटीएम सहित सभी प्रकार की उपयोगी सामग्री प्रदान की गई थी। इस दौरान जिले में करीब 21 लाख खुले। खाताधारकों के लिए इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से पीएम सुरक्षा बीमा और जीवन ज्योति बीमा योजना को भी शुरू किया गया था। दोनों योजनाओं के जिले में 14 हजार लाभार्थियों के होने का दावा किया गया।
बैंक से मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का सालाना प्रीमियम 12 रुपये और जीवन ज्योति बीमा योजना का वार्षिक प्रीमियम केवल 330 रुपये ही जमा करना पड़ता है। लेकिन इसमें भी सात लाख खाताधारकों ने यह मामूली धनराशि जमा नहीं की इसलिए इनको इस योजना का लाभ भी नहीं मिल सका। इधर जिला अग्रणी अधिकारी मदन मोहन प्रसाद का कहना है कि पैसा न जमा करने पर तीन साल तक तो खाता जीवित रहता है। उसके बाद खाते बंद कर दिए जाते हैं। जो खाता खुलवाना चाहेगा, उसे फिर से चालू कराना पड़ेगा।
खूब किया गया था प्रचार-प्रसार
केंद्र सरकार की तरफ से जनधन खाताधारकों के लिए लागू योजनाओं के लिए ग्रामीण इलाकों में सीएससी संचालकों की भी मदद ली गई थी। जबकि शहरी इलाकों में स्थित बैंकों में बैनर-पोस्टर लगाने के साथ ही उपभोक्ताओं के बीच पहुंचकर बैंकों की योजनाओं व पैसों की बचत से होने वाले लाभों के बारे में भी बताया गया था। लेकिल समय बढ़ने के साथ ही ग्राहकों को जागरूक करने का प्रयास सफल नहीं हो सका। अधिकांश परिवारों की बेहतर आय नहीं होने से वह नियमित रूप से खातों में पैसा नहीं जमा कर सके। कुछ परिवार तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने एक बार खाता खोलने के समय ही बैंक का मुंह देखा था। इसके बाद दोबारा बैंक जाने की जरूरत ही नहीं समझी।