नैनीताल: खौफ के साए में जी रहा ज्योलीकोट का खूबसूरत चोपड़ा गांव, कब जागोगे सरकार… देखें VIDEO

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संजय पाठक, अमृत विचार। हद हो गई साहब… जिन गांव पहाड़ों को बचाने और उन तक विकास की किरण पहुंचाने के लिए राज्य की मातृशक्ति, बड़े बुजुर्गों और युवाओं ने राज्य निर्माण का आंदोलन किया था, आज पहाड़ के वहीं गांव खुद को बचाने की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन सरकारी सिस्टम है कि बेफिक्री की चादर ओड़े चैन की नींद सोया हुआ है।

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आप कहेंगे आखिर हम ऐसा क्यों कह रहे हैं तो पहले यह जान लीजिए। हम बात कर रहे हैं नैनीताल जिले के खूबसूरत चोपड़ा गांव की। दिलकश प्राकृतिक नजारों और हरियाली के बीच बसा ज्योलीकोट क्षेत्र का चोपड़ा गांव पिछले साल यानि 19 अक्टूबर 2021 में आई आपदा से दहशत के साए में जी रहा है।

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खौफ के साए में जीने को मजबूर चोपड़ा गांव की मातृशक्ति और बच्चे।

वजह है इस गांव के ठीक ऊपर लटकती बड़ी बड़ी चट्टानें, जो कभी भी दरककर चोपड़ा गांव को जमींदोज कर सकती हैं। यह चट्टानें अब लगातार टूटती जा रही हैं। चोपड़ा गांव के तोक मल्ला दांगड़, तल्ला दांगड़ से आमपड़ाव और हाईवे तक मलबा और बोल्डर गिर रहे हैं। सोच कर देखिए 70 से अधिक परिवार इन दिनों डर के साए में कैसे जी रहे होंगे। अपने बुजुर्गों की बसी बसाई यादें हो या फिर खेत खलिहान और मवेशी… पल भर में खोने का डर तो है ही सैकड़ों जिंदगियों पर भी खतरा मंडरा रहा है लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिल रही।

देखें वीडियो: प्रकृति की हसीन वादियों से घिरे चोपड़ा गांव का दर्द, जिसकी प्रशासन से लेकर सरकार ने की अनदेखी

आप कहेंगे आखिर ग्रामीण आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं? जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक बात पहुंचती तो राहत के कुछ उपाय भी होते। सोशल मीडिया का जमाना है भाई ग्रामीणों की आवाज सुनकर सरकार जरुर समाधान करती। लेकिन सच्चाई यह है कि उत्तराखंड का यह गांव पिछले 10 महीनों से चीख चीखकर खुद के अस्तित्व को बचाने की गुहार लगा रहा है। क्या डीएम क्या कमिश्नर और क्या मुख्यमंत्री हर चौखट पर ग्रामीण अपना दर्द रख चुके हैं लेकिन सरकारी सिस्टम है कि जागने का नाम ही नहीं ले रहा है।

हां, इतना जरुर है कि जब गांव का दर्द टीवी अखबारों में हेडिंग बनता है तो अधिकारियों की टीम दलबल के साथ सर्वे करने गांव जरुर पहुंच जाती है। लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता। यही वजह है कि चोपड़ा गांव निवासी देश के मशहूर आरजे पंकज जीना भी पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर गांव का बचाने के लिए जी जान से जुटे हैं। आरजे पंकज जीना कहते हैं कि कभी कभी, बखत आपके साथ नहीं होता। यही हो रहा है हमारे साथ। उत्तराखंड की मांग जब पूरी हुई थी, सबको उम्मीद थी कि अब तो सुनी जाएगी हमारी बातें। उस वक़्त अंदाज़ा नहीं था कि सिर्फ सिंहासन की सीमाएं बदली हैं, बाकी सब कुछ वैसा ही है। बीते एक बरस से, जब एक सरकारी काम हमारे गांव में अटका हुआ है, तो बाकी गांव का क्या ही कर सकते हैं।

गांव चोपड़ा निवासी जाने माने आरजे पंकज जीना।

गांव चोपड़ा, मल्ला दांगड़ तोक, पोस्ट ज्योलीकोट, जिला नैनीताल। वैसे तो यह पहचान मेरे गांव की है लेकिन अब यह पहचान इतिहास बनने से पहले छटपटाते गांव की है। जिसके सिर पर बोल्डर आ खड़े हैं और जिनको सिर्फ भू वैज्ञानिकों के सर्वेक्षण के बाद आसानी से तुड़वाया जा सकता है। 21वीं सदी और डिजिटल तकनीकों के बाद भी अफसोस मेरा राज्य उत्तराखंड, इससे कोसों दूर है और शायद हम अभी भी राजशाही वाले दौर में जी रहे हैं। याद रखना साहब और सत्ताओं के रखवालों, याद रखना कि हम इस बात को भूलेंगे नहीं। शायद सत्ता और राजशाही को यह अभिमान हो गया है कि उनको कोई तोड़ नहीं सकता लेकिन यह सब याद रखा जाएगा। हे गोल्ज्यू, अब तुम्हारे ही हाथ में है पहाड़, अब तुम्हारे ही चरणों में, तुम्हारे ही भरोसे है मेरा घर गांव चोपड़ा…

अमृत विचार के मंच से हम भी जिला प्रशासन और सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी से यही कहेंगे कि अब तो जाग जाइये। जल्द से जल्द चोपड़ा गांव को खतरे की जद से आजाद कराने की मुहिम शुरू कर साबित कर दीजिए कि उत्तराखंड के गांव पहाड़ आपके लिए भी उतना ही मायने रखते हैं जितना यहां के आम लोगों के लिए।

देखें वीडियो: कैसे खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं चोपड़ा गांव के लोग

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