मुरादाबाद : ग्रामीणों ने थाना प्रभारी और टीम का घेराव किया, मचा हड़कंप

 ग्रामीणों ने गोकशी के झूठे मामले में चार लोगों को जेल भेजने का पुलिस पर लगाया आरोप, कुंदरकी विधायक जियाउर रहमान वर्क के हस्तक्षेप बाद विवाद ने पकड़ा तूल, ग्रामीण व थाना प्रभारी के विरोधाभासी दावों की तहकीकात करने में जुटे उच्चाधिकारी

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मुरादाबाद, अमृत विचार। भगतपुर का खैरखाता गांव गोकशी की घटनाओं के लिए चर्चित है। बुधवार देर रात पुलिस ने गांव में छापेमारी की। गोकशी के आरोप में गांव के जावेद पुत्र जमील, आरिफ पुत्र जहूर, मुख्तार पुत्र अबरार व तसलीम पुत्र नन्हे को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गुरुवार को चारों अभियुक्त जेल भेजे गए।
हालांकि, ग्रामीण दो अभियुक्तों को निर्दोष बताकर भगतपुर पुलिस पर पूर्वाग्रही होने का आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों की सूचना पर कुंदरकी विधायक जियाउर रहमान बर्क भी गुरुवार को खैरखाता गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों के मुताबिक विधायक अभियुक्तों के घर वालों से मिले।

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थाना प्रभारी से हुई नोकझोंक: शुक्रवार की सुबह मामले में तब नया मोड़ आया, जब खैरखाता गांव के एक युवक ने डायल 112 पर सूचना दी कि गांव में लोगों की भीड़ जमा है। ग्रामीण पुलिस की कार्यप्रणाली का विरोध कर रहे हैं। उधर, कुछ ही देर में वहां पीआरवी (पुलिस रिस्पांस व्हीकल) पहुंच गई। ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों से गोकशी के मुकदमे का साक्ष्य मांगा।

तब पुलिसकर्मियों ने प्रकरण अधिकार क्षेत्र से बाहर होने की दलीलें देनी शुरू कर दी। इसकी जानकारी भगतपुर थाना प्रभारी को मिली तो वह कुछ देर में दो वाहनों से मौके पर पहुंच गए। तब तक भीड़ पुलिस वाहन के आसपास जमा हो चुकी थी। इसमें महिलाओं की संख्या अधिक थी। थाना प्रभारी से ग्रामीणों की नोकझोंक शुरू हुई।

एसपी ग्रामीण विद्या सागर मिश्र का कहना है कि भगतपुर पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर गोकशी का मुकदमा दर्ज कर अभियुक्तों को जेल भेजा है। सीओ ठाकुरद्वारा ने ग्रामीणों के आरोपों का शांतिपूर्ण समाधान कर दिया। पुलिस की पैनी नजर हालात पर है। जानबूझकर यदि माहौल खराब करने की किसी ने कोशिश की होगी तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के खिलाफ किसने रची साजिश?
खैरखाता गांव के लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काने की चर्चा है, जिससे लोग पुलिस की कार्रवाई पर संदेह कर रहे हैं। इस परिणामस्वरूप ग्रामीण पुलिस के खिलाफ लामबंद हो गए। चर्चा यह भी है कि एक धार्मिक स्थल से माइक से पुलिस के खिलाफ लोगों को उकसाया गया। इसके बाद लोग उग्र होकर पुलिस के वाहनों को घेर लिया।

गोकशी का साक्ष्य दफन वाले स्थल की हुई लोगों के सामने खोदाई
ग्रामीण उच्चाधिकारियों को बुलाने की मांग कर रहे थे। कुछ देर बाद सीओ ठाकुरद्वारा पहुंचे व ग्रामीणों से बात की। तब दोनों पक्षों में उस गड्ढे को दोबारा खोदने पर सहमति बनी, जिसमें गोकशी का साक्ष्य दफन होने का दावा पुलिस कर रही थी। चार ग्रामीणों के अलावा सीओ ठाकुरद्वारा की टीम बनाकर गड्ढे की खोदाई की गई। गड्ढे में एक गोवंश दफन मिला। इस पर लोग बैकफुट पर आ गए।

ऐसे हुई ग्रामीणों में गफलत
ग्रामीणों में गफलत की वजह क्या रही ? यह सवाल सभी के जेहन में देर शाम तक कौंधता रहा। ग्राम प्रधान हाजी शाकिर के मुताबिक पूर्व में पुलिस ने कई बार गोकशी से संबंधित साक्ष्य बरामद किए। साक्ष्य ग्राम प्रधान व चौकीदार की मौजूदगी में पुलिस दफन करती थी। दो दिन पूर्व पुलिस ने जब साक्ष्य जमीन में दबाया तब मौके पर वह मौजूद नहीं थे। पुलिस की इस चूक से ही ग्रामीणों के बीच पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगा।

एमडी ने विवादित एसडीओ का संभल किया तबादला
मुरादाबाद। सीतापुरी बिजलीघर एसडीओ से मारपीट मामले में दंडित हुए पीतलबस्ती एसडीओ पर आखिरकार गाज गिर ही गई। प्रबंध निदेशक ने आरोपी एसडीओ का तबादला संभल कर दिया है। एक्सईएन (एचआर) के आदेश पर दंडित एसडीओ को तत्काल रिलीव कर नवीन तैनाती पर कार्य भार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। एक्सईएन तृतीय के कार्यालय में पीतलबस्ती एसडीओ राजवीर कटारिया ने टीजीटू के खिलाफ चल रही जांच में रिपोर्ट बदलने को
कहा था।

सीतापुरी बिजलीघर पर तैनात एसडीओ ब्रजेश कुमार ने बताया कि 28 अगस्त 2020 को इसी को लेकर हुई कहासुनी के बाद एसडीओ राजवीर ने उनके साथ मारपीट की थी। मामले की जांच एमडी ऑफिस के अधिकारियों ने की थी। इसमें एसडीओ राजवीर कटारिया पर लगे आरोप सही पाए गए। इस पर एमडी पश्चिमांचल अरविंद मल्लपा बंगारी ने आरोपी एसडीओ की एक साल तक वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी थी। उन्हें परिनिंदा प्रविष्टि भी दी गई थी। इधर, एसडीओ राजवीर कटारिया के तबादले से विभाग के अन्य विवादित अधिकारियों में हड़कंप मचा है।

आरोपी एसडीओ को तत्काल आमद दर्ज करा भेजनी है रिपोर्ट
भविष्य में किसी भी संवेदनशील पद पर तैनाती न किए जाने के आदेश दिए गए थे। स्थानीय अधिकारियों के चहेते राजवीर सिंह कटारिया को एमडी के आदेश के बाद भी स्थानीय अधिकारियों ने पीतलबस्ती से नहीं हटाया था। इसकी जानकारी भी किसी तरह एमडी ऑफिस तक पहुंच गई। तब एमडी ने तत्काल प्रभाव से आरोपी एसडीओ राजवीर कटारिया का तबादला संभल एसई आफिस के लिए कर दिया। एमडी आफिस ने आरोपी एसडीओ को तत्काल आमद दर्ज कराकर रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है।

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