बदायूं: जिला अस्पताल पहुंची एसआईटी, डॉक्टर से की बातचीत

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बदायूं, अमृत विचार। एसएसपी कार्यालय परिसर में किसान कृष्णपाल के आत्मदाह करने के मामले में आईजी रमित शर्मा की ओर से गठित एसआईटी ने अपनी जांच तेज कर दी है। रविवार को एसआईटी ने कृष्णपाल की गेहूं की फसल जलाने वाले स्थान से पड़ोस के गांव दौरी तक की दूरी देखी। इस दौरान यह देखा गया कि दौरी गांव में आतिशबाजी करने पर चिंगारी घटना स्थल तक जा सकती है या नहीं। इसके बाद टीम ने कृष्णपाल के परिवार वालों से बात की। देर शाम एसआईटी ने जिला अस्पताल जाकर उन डाक्टरों से बात की, जिन्होंने कृष्णपाल का सबसे पहले इलाज किया था।

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सिविल लाइंस इलाके के रसूलपुर बिलहरी गांव निवासी कृष्णपाल की 23 अप्रैल को खेत में गेहूं की फसल जला दी गई थी। इस पर कृष्णपाल ने मंडी समिति चौकी जाकर तहरीर दी। पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय विरोधी पक्ष को लोगों को बता दिया। इस पर बौखलाए विरोधी पक्ष के लोगों ने 24 अप्रैल को कृष्णपाल के घर में घुसकर पूरे परिवार को पीटा।

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कृष्णपाल के तहरीर देने पर पुलिस ने रामेश्वर पुत्र लाखन, उसका भाई ओमेन्द्र, रामेन्द्र पुत्र रामदास, उसका भाई श्रीराम, विवेक पुत्र रामौतार, ओमवीर पुत्र रामेश्वर व उसका भाई देवेन्द्र पुत्र रामेश्वर और रामौतार पुत्र लाखन के खिलाफ रिपोर्ट तो लिख ली, विरोधी पक्ष से साठगांठ करके पीड़त को धमकाने लगी। यही नहीं समझौते के लिए दबाव बनाने के लिए विरोधी पक्ष की ओर से कृष्णपाल के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।

इसके बाद कृष्णपाल चौकी, थाने और पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उनकी कहीं नहीं सुनी गई। उल्टे विरोधी पक्ष के लोग और पुलिस वाले कृष्णपाल को बेइज्जत करते थे। उनकी प्रताड़ना से तंग आकर कृष्णपाल ने 18 मई को एसएसपी कार्यालय में आत्मदाह कर लिया था।

उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने के आरोप में पुलिस रामेश्वर पुत्र लाखन, उसके भाई ओमेन्द्र, रामेन्द्र पुत्र रामदास, उसके भाई श्रीराम, विवेक पुत्र रामौतार, ओमवीर पुत्र रामेश्वर व उसके भाई देवेन्द्र पुत्र रामेश्वर और रामौतार पुत्र लाखन को जेल भेज चुकी है। इस पूरे मामले की जांच के लिए आईजी रमित शर्मा ने बरेली एसपी सिटी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की है।
रविवार की शाम एसआईटी फिर रसूलपुर गांव पहुंची। कृष्णपाल ने अपने गेहूं जलाए जाने की शिकायत आईजीआरएस पर की थी। लखनऊ से जांच कराने पर

मंडी समिति चौकी इंचार्ज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शादी समारोह के दौरान की गई आतिशबाजी की चिंगारी से गेहूं की फसल में आग लग गई थी। 23 अप्रैल को रसूलपुर से सटे ही दौरी गांव में शादी समारोह था। रसूलपुर पहुंची एसआईटी ने सबसे पहले जाकर उस खेत को देखा जहां फसल जलाई गई थी। वहां से पैदल चलकर टीम पड़ोस के गांव दौरी गई और वहां के लोगों से पूछताछ की। वहां छानबीन करने के बाद टीम लौटकर रसूलपुर गई और कृष्णपाल के बेटे अमरजीत व परिवार के अन्य लोगों से घटना के संबंध में बात की।

वहां रवाना होने के बाद टीम सीधे जिला अस्पताल पहुंची। 18 मई को एसएसपी कार्यालय में आत्मदाह करने के बाद जिला अस्पताल ले जाए गए कृष्णपाल को सबसे पहले डा. रियाज हुसैन देखा था। रविवार को जिला अस्पताल पहुंची एसआईटी ने कृष्णपाल से संबंधित कई सवाल डा. रियाज अहमद से किए। स्टाफ से भी पूछताछ की और रिकार्ड चेक किया। वहां 15 मिनट छानबीन करने के बाद टीम रवाना हो गई।

पत्नी और बेटे की तबियत बिगड़ी
कृष्णपाल की मौत से पूरा परिवार टूट गया है। मुकदमे में नामजद लोगों के जेल जाने के बावजूद परिवार दहशत में है। रविवार को कृष्णपाल की पत्नी सुमन और बेटे अमरजीत की हालत बिगड़ गई। उन्हें दवा तो दिलादी गई, लेकिन वह कृष्णपाल की मौत के गम से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

कांग्रेसियों ने की पीड़त परिवार से मुलाकात
कांग्रेसे के जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह रविवार को महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सुनीता सिंह, मोरपाल प्रजापति, रामरतन पटेल, सोनपाल सिंह के साथ रविवार शाम करीब चार बजे रसूलपुर पहुंचे। वहां उन्होंने कृष्णपाल के बेटे अमरजीत व उनके परिवार के अन्य लोगों से घटना के संबंध में बातचीत की। साथ ही पूरी मदद का वायदा किया। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को हर हाल में इंसाफदिलाया जाएगा।

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