बरेली: बीमारियों से ग्रसित बिल्लियों की बढ़ रही तादाद

अमृत विचार, बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान स्थित रेफरल वेटेरिनरी पॉलीक्लिनिक में हर साल श्वान, गाय, भैंस, शूकर, भेड़, बकरी से लेकर विभिन्न प्रकार के करीब छह हजार पशु इलाज के लिए आते हैं। सर्जरी विभाग यहां इलाज को आए पशुओं का आंकड़ा तैयार करता है। आंकड़ा तैयार करते समय पता चला है कि …
अमृत विचार, बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान स्थित रेफरल वेटेरिनरी पॉलीक्लिनिक में हर साल श्वान, गाय, भैंस, शूकर, भेड़, बकरी से लेकर विभिन्न प्रकार के करीब छह हजार पशु इलाज के लिए आते हैं। सर्जरी विभाग यहां इलाज को आए पशुओं का आंकड़ा तैयार करता है।
आंकड़ा तैयार करते समय पता चला है कि इन दिनों पॉलीक्लीनिक में बांझपन, पेशाब नली में पथरी, उल्टी-दस्त व अन्य कई तरह की बीमारियों से ग्रसित बिल्लियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। यही वजह है कि इन बीमारियों के इलाज के लिए में लगातार बीमार हो रही बिल्लियों की संख्या का आंकड़ा पांच साल में कई गुना पहुंच गया है।
ऐसे में आइवीआरआई के सर्जरी विभाग ने विचार किया है कि बैचलर ऑफ वेटनरी साइंस (बीवीएससी) के कोर्स में बिल्लियों से जुड़ी बीमारी और उपाय के बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़ाए जाने के लिए वह सुझाव देंगे। सर्जरी विभाग के प्रमुख डा. अमर पाल बताते हैं कि लोगों में बिल्ली पालन का रुझान बढ़ रहा है।
अभी हमारे बीवीएससी करिकुलम में भेड़, बकरी, श्वान, शूकर, खरगोश सहित कई पशुओं के बारे में तो पढ़ाया जाता है। लेकिन बिल्ली के बारे में मात्र एक से दो फीसद ही पढ़ाया जाता है जो कि बहुत कम है। जिस तरह बिल्लियों की संख्या बढ़ रही, उससे जरूरत है कि कोर्स में इसके बारे में और ज्यादा जानकारी शामिल की जाए। चूंकि यह कोर्स वेटेरिनरी काउंसिल ऑफ इंडिया हर पांच साल पर रिवाइज्ड करती है, इसलिए उसमें हम सुझाव देंगे। आइवीआरआई रेफरल वेटेरिनरी पॉलीक्लिनिक में रामपुर,मुरादाबाद, लखनऊ सहित आसपास जिले से इन्हें बीमारी ठीक कराने के लिए लाया जाता है।
आइवीआरआई क्लीनिक के आंकड़े
सर्जरी में आई बिल्लियां मेडिकल में आई बिल्लियां
2014-15 – 63 49
2015-16 – 72 91
2016-17 – 96 107
2017-18 – 159 168
2018-19 – 187 239
2019-20- 238 338