कासगंज : नौनिहालों के निवाले पर डाका, आखिर कौन डकार गया पोषाहार का धन
तीन माह से नहीं मिला नौनिहालों को पका पकाया भोजन

गुडडू यादव कासगंज। वैसे तो जिसे जहां मौका मिला रहा है। वह सरकारी धनराशि को लूटने में पीछे नहीं है। चाहे वह संगठित लूट की जा रही है। या फिर योजनाबंद्ध तरीके से सरकारी धन पर डांका डाला जा रहा है। वैसे तो तमाम मामले देखने को मिल जाएगें, लेकिन एक बड़ा मामला बाल विकास का सामने आया है। जहां आंगनबाडी कार्यकत्री एवं ग्राम प्रधानों की मिली भगत से बड़ा घोटाला हुआ है। गर्मी की छुटटी और सामान्य अवकाश के दिनों में भी हॉट कुक्ड योजना के तहत पोषाहार आंगनबाडी केंद्रो पर बांटा जाता रहा। बड़े घोटाले की कलई खुली है। पता चला है कि आंगनबाडी कार्यकर्ता और ग्राम प्रधान सामूहिक रुप से इस योजना के तहत मिली धनराशि को चट कर गए।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पल रहे गरीब परिवार के नौनिहालों को गर्म भोजन (हॉटकुक्ड) देने की व्यवस्था पर तीन माह से ग्रहण लग गया है। तीन माह से बच्चों को भोजन नहीं मिल रहा है। हॉट कुक्ड बनाने के लिए आने वाली धनराशि लगातार आंगनबाड़ी और प्रधान के संयुक्त खातों में पहुंच रही है। हॉट कुक्ड को आने वाली धनराशि को ग्राम प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकत्री डकार रहे हैं या फिर कोई और अन्य अधिकारी डकार गए। इस तरह के तमाम सवाल उस समय खड़े हो गए हैं, दस्तावेज मजबूती के साथ घोटाले की गवाई दे रहे हैं। जिम्मेदार कठघरे में खड़े दिखाई दे रहें हैं, उन पर जबाब देते नहीं बन रहा है। आंकडे की नजर से देखें तो...
2,445 आंगनबाड़ी केंद्र जिले भर में ,
1,647 केंद्रो पर ही आती रही इस योजना के तहत धनराशि
28 मार्च को अंतिम बार स्कूलों में आया था धन
798 केंद्रो पर तकनीकि अव्यवस्था के कारण नहीं आई धनराशि
इन महीनों में हुआ घपला
अप्रैल, मई, जून से पका पकाया भोजन नहीं मिल रहा हैं। बाल विकास विभाग प्रधान और आंगनबाड़ी के खातों में लगातार तीन माह से भोजन बनाने के लिए धनराशि भेजा है, लेकिन यह धनराशि कहां जा रही है। इस बारे में किसी को नहीं पता है।
28 मार्च को आंगनबाडी कार्यकत्री और प्रधान के संयुक्त खातो में धनराशि भेजी गई थी, लेकिन मई की छुटटी थी, जून में जिलाधिकारी के आदेश पर अवकाश रहा था। अप्रैल में भी हॉड कुक्ड के तहत भोजन नहीं बंटा यह सब दस्तावेज के आधार पर है। किस आधार पर धनराशि निकाली गई है, इसकी बिंदूबार जांच की जाएगी। -सुशीला यादव, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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