नैनीताल: वेट लैंड की रिपोर्ट एक माह में पेश करें, सूखाताल झील के आसपास रहने वालों की याचिका खारिज

विधि संवाददाता, नैनीताल, अमृत विचार। हाईकोर्ट ने सूखा ताल में सौंदर्यीकरण के नाम पर हो रहे भारी भरकम निर्माण कार्यों पर रोक व अतिक्रमण हटाने को लेकर स्वतः संज्ञान लिए जाने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई की।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खण्डपीठ ने प्रदेश में वेट लैंड के बारे में वेट लैंड अथॉरिटी को एक माह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान अथॉरिटी ने कोर्ट को अवगत कराया कि उनके पास प्रदेश में वेट लैंड की रिपोर्ट आ चुकी है।
जिलाधिकारी नैनीताल ने भी सूखा ताल व एक अन्य झील को वेट लैंड घोषित करने के लिए अपनी रिपोर्ट स्टेट वेट लैंड अथॉरिटी को भेज दी है इसलिए रिपोर्ट पेश करने के लिए उन्हें समय दिया जाए। वहीं, याचिका में सूखाताल झील के आसपास रहने वाले लोगों ने प्रार्थना पत्र देकर कहा कि झील भरने से उनके घरों में पानी घुस गया है इसलिए पानी की निकासी कराई जाए लेकिन कोर्ट ने उनके प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।
सरकार बताए, क्या प्लान बनाया
नैनीताल, अमृत विचार: हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने नैनीताल के जिला अस्पताल में कई स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव होने के खिलाफ दायर पूर्व अध्यापक अशोक साह की याचिका पर सुनवाई की। खंडपीठ ने सरकार से जवाब मांगा है कि अस्पताल की अतिक्रमण मुक्त भूमि के विकास के लिए क्या कोई प्लान बनाया है तो उसे चार सप्ताह में पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होगी। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि प्रशासन ने अस्पताल की भूमि से अतिक्रमण हटवा दिया है।