बाराबंकी: बच्चियों से मिलने के लिए भटक रहीं माताएं, समाजसेवी महंत बीपी दास ने डीएम को भेजा पत्र

बाराबंकी। अवध आसाम एक्सप्रेस से सूरत,गुजरात ले जाई जा रही 6 नाबालिग बच्चियों का प्रकरण धीरे- धीरे तूल पकड़ता जा रहा है। बीती शनिवार 12 मार्च को बिहार के जिला समस्तीपुर ,पोस्ट ,बाराही थाना बिहान से 6 नाबालिग बच्चियों को शिक्षा के नाम पर सूरत गुजरात के एक मदरसे में ले जाया जा रहा था। …

बाराबंकी। अवध आसाम एक्सप्रेस से सूरत,गुजरात ले जाई जा रही 6 नाबालिग बच्चियों का प्रकरण धीरे- धीरे तूल पकड़ता जा रहा है। बीती शनिवार 12 मार्च को बिहार के जिला समस्तीपुर ,पोस्ट ,बाराही थाना बिहान से 6 नाबालिग बच्चियों को शिक्षा के नाम पर सूरत गुजरात के एक मदरसे में ले जाया जा रहा था। बच्चियों की उम्र 6 से 11 साल के बीच है।

बच्चियों को उनके गांव से शिक्षा के लिए  ले जाने वाले अकबर व सरताज नाम के व्यक्ति को बाराबंकी जीआरपी पुलिस ने बच्चियों समेत उस समय ट्रेन से उतार लिया जब उन बच्चियों में से एक को रोता हुआ देख सहयात्री द्वारा  संदिग्ध लगने पर चाइल्ड लाइन नंबर 1098 पर सूचना दी गई।

चाइल्ड हेल्पलाइन के डायरेक्टर रत्नेश कुमार ने मामले की गंभीरता और संदिग्धता को देखते हुए तुरंत जीआरपी को सूचित किया कि कुछ लोग बच्चियों को जबरदस्ती कहीं ले जा रहे हैं । बाराबंकी जीआरपी ने एक्शन लेते हुए रात 12:00 बजे अकबर और सरताज सहित बच्चियों को ट्रेन से उतार लिया । मौके पर चाइल्ड हेल्प लाइन के डायरेक्टर समेत पूरी टीम मौजूद रही। पुलिस की गहन पूछ -ताछ के बाद दूसरे दिन शाम को अकबर और सरताज को इसलिए छोड़ दिया गया क्योंकि उनके खिलाफ एफआईआर किसी ने दर्ज नहीं कराई।

जीआरपी थानाध्यक्ष अनूप कुमार वर्मा को यह कहते हुए कि मामला मानव तस्करी का है एफआईआर दर्ज कर दोनों को जेल भेजें यह दबाव सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष बाला चतुर्वेदी द्वारा बनाया गया। इंस्पेक्टर का साफ कहना था चाइल्ड  हेल्पलाइन या सीडब्ल्यूसी की तरफ से तहरीर ना होने के कारण अकबर और सरताज को छोड़ दिया गया।

सवाल उठता है किस अपराध की सजा उठा रही है बच्चियां और उनके अभिभावक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी 6 नाबालिग बच्चियों को बाल कल्याण समिति लखनऊ में रखा गया है। जबकि घटना की जानकारी होने के दूसरे दिन अपनी बच्चियों की सूचना मिलने पर लेने आए उनके अभिभावक अपने कलेजे के टुकड़ों से मिलने के लिए बेताब हैं और दर-दर भटक रहे हैं। इसी बीच जिले के प्रख्यात समाजसेवी महंत बीपी दास तथा गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित राजन शर्मा ने बच्चियों के अभिभावक को गांधी भवन में ठहरने की और का प्रबंध किया।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि बच्चियों को ले जाने वाले अकबर और सरताज को पुलिस ने छोड़ दिया और उन 6 निर्दोष बच्चियों को लगभग एक सप्ताह से अधिक समय से उनके अभिभावकों से  दूर रखा गया। कोई भी संवेदनशील समाज इस बात को सुनते ही दांतो तले उंगली दबाने को मजबूर  होगा।

जांच रिपोर्ट आ जाने के नाम पर आखिर कितना वक्त अपनी मां से दूर रहेंगी बच्चियां ?कब आएगी जांच रिपोर्ट? और कब सीडब्ल्यूसी सुनाएगा इन बच्चियों पर फैसला ? घटना के लगभग सप्ताह भर से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बच्चियों की रिहाई की तस्वीर अभी धुंधली ही नजर आ रही है। वहीं बच्चियों और उनके परिजनों को न्याय  दिलाने के लिए महंत बीपी दास ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है ।

क्या बोली सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष

इस पूरे प्रकरण पर जब सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष बाला चतुर्वेदी से बात हुई तो उन्होंने बताया होली पड़ जाने के कारण डीएम समस्तीपुर से जो रिपोर्ट आनी थी, वह अभी नहीं मिल आ सकी है हम लगातार सम्पर्क में हैं । उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद ही कोई फैसला लिया जा सकता है। पूछने पर कि अब तक कोई जांच रिपोर्ट आई ,जवाब मिलता है रिपोर्ट आएगी तो जानकारी दी जाएगी।

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