बरेली: ‘मैं अनाथ हूं…मुझे रहने को कोई जगह नहीं है…शरण दिलवा दो’

बरेली,अमृत विचार। मैं बचपन से अनाथ हूं…मुझे रहने की भी कोई जगह नहीं है। मुझे शरण दिलवा दो। यह शब्द थे, उस अनाथ लड़के के जो भटकर किसी तरह से बरेली पहुंच गया था। चाइल्ड लाइन उसे अपने साथ ले आई लेकिन दिक्कतें तब पैदा हुईं जब उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश …
बरेली,अमृत विचार। मैं बचपन से अनाथ हूं…मुझे रहने की भी कोई जगह नहीं है। मुझे शरण दिलवा दो। यह शब्द थे, उस अनाथ लड़के के जो भटकर किसी तरह से बरेली पहुंच गया था। चाइल्ड लाइन उसे अपने साथ ले आई लेकिन दिक्कतें तब पैदा हुईं जब उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश किया गया।
सीडब्ल्यूसी ने लड़के का मेडिकल कराया तो उसकी उम्र 18 वर्ष निकली। यानि लड़का बालिग हो चुका है। जिसके बाद सीडब्ल्यूसी के नियमों के दायरे से वह बाहर हो चुका था। उसे न तो चाइल्ड लाइन में रखा जा सकता था और न ही अनाथालय में तब से चाइल्ड लाइन की दिक्कतें बढ़ी हुई हैं। सभी इस असमंजस में है कि आखिरी उसे कहां रखा जाए। इस मामले को लेकर शुक्रवार को एसडीएम और डीएम की अध्यक्षता में चर्चा की जाएगी।
चाइल्ड लाइन के मुताबिक 26 अप्रैल को 1098 पर एक फोन आया जिसमें लड़के ने कहा कि वह अनाथ है और उसे शरण चाहिए। जिसके बाद उसके बताए गए स्थान पर चाइल्ड लाइन की टीम पहुंच गई। काउंसलिंग में पता चला कि लड़के का नाम अर्जुन है। वह पांच साल की उम्र में ही अनाथ हो गया था। उसे अपना मूल पता भी नहीं पता। कांउसलिंग को जब और आगे बढ़ाया गया तो पता चला कि वह देश के कई अलग-अलग अनाथालयों में रह चुका था।
सबसे पहले वह इंदौर में रहा था। इसके बाद जबलपुर, बंगाल, दिल्ली आदि अनाथालयों में रह चुका था। आखिरी समय वह गाजियाबाद के अनाथालय में रह रहा था। वहां से भाग निकला और अब वह 18 साल का हो गया। इसके बाद कोई अनाथालय उसे लेने के लिए भी तैयार नहीं है तब से वह चाइल्ड लाइन के हवाले ही है। चाइल्ड लाइन की टीम इस असमंजस में है कि आखिर उसे कहां भेजा जाए। हालांकि शुक्रवार को एसडीएम इस बारे में कुछ सलाह दे सकते हैं।
“हां मामला संज्ञान में है लेकिन 18 साल से ऊपर के बच्चों को हमारे यहां रखने की कोई गाइडलाइन नहीं है। ऐसे में उसे कहां रखा जाएगा, इस बारे में शुक्रवार को एसडीएम के यहां फैसला किया जाएगा।” -नीता अहिरवार, डीपीओ