मुरादाबाद :  कमीशन के खेल से अभिभावक परेशान, निजी स्कूल हर साल बदल देते हैं किताबें

सीबीएसई से जुड़े स्कूल सिलेबस में एनसीईआरटी की किताबें ही कर सकते हैं शामिल, फिर भी कर रहे मनमानी

मुरादाबाद :  कमीशन के खेल से अभिभावक परेशान, निजी स्कूल हर साल बदल देते हैं किताबें

मुरादाबाद,अमृत विचार। नए सत्र में प्रवेश शुरू होते ही महानगर के निजी स्कूलों में किताब लेने के नाम पर अभिभावकों को जमकर चूना लगाया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन हर साल सिलेबस बदल देते हैं। कमीशन के चक्कर में नियमों का खुलेआम मखौल उड़ाते हुए निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आलम यह है कि छात्रों के प्रयोग में आने वाली स्टेशनरी की भी उन्होंने सूची बना रखी है। इससे अलग ब्रांड का सामान लेने पर छात्रों को कक्षा में प्रताड़ित किया जाता है।

सीबीएसई से जुड़े स्कूल पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की ही किताबें शामिल कर सकते हैं, जबकि निजी स्कूल कमीशन के फेर में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें ही पाठ्यक्रम में शामिल कर रहे हैं। निजी प्रकाशक अपनी किताबें लागू करवाने के लिए स्कूलों को मोटा कमीशन देते हैं। स्कूलों को भी संबंधित दुकानदारों से 30 से लेकर 50 प्रतिशत कमीशन का लाभ मिलता हैं। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों से कहा गया है कि निजी प्रकाशकों की किताबें ही खरीदें। जिनकी कीमत पांच से लेकर सात हजार रुपये तक है। वह बाकायदा अभिभावकों को लिस्ट देकर मौखिक तौर बता देते हैं कि किस दुकान से किताबें खरीदनी हैं।

रामगंगा विहार के अभिभावक राकेश शर्मा, सतीश गुप्ता, सचिन चौधरी, हिमांशी शर्मा आदि ने बताया कि पहले साल दर साल एक ही पाठ्यक्रम रहता था। परिवार के कई बच्चे उन्हीं पाठ्य पुस्तकों से पढ़कर अगली कक्षाओं में प्रवेश लेते थे। अब निजी स्कूल संचालक हर साल किताबें बदल देते हैं। मध्यम वर्ग का अभिभावक कैसे इस खर्च को वहन करेगा। स्कूलों की मनमानियों पर रोक लगाई जानी चाहिए। जबकि, जिम्मेदार अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं।

किताबें बेचने को शिक्षकों की लगा रखी है ड्यूटी
सीबीएसई, सीआईएससीई से मान्यता प्राप्त स्कूलों के संचालकों ने किताबें, स्टेशनरी बेचने के लिए अपने यहां शिक्षकों की ड्यूटी भी लगा रखी है। कई स्कूलों में तो परिसर के अंदर ही दुकानें लगाकर अभिभावकों को स्कूल से ही किताबें, स्टेशनरी खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार किताबें महंगी होने से हर तरह से जेब अभिभावकों की ही कटनी है। प्री नर्सरी से लेकर आठवीं तक के कक्षाओं की एनसीईआरटी की किताब 50 रुपये से अधिक मूल्य की नहीं है। जबकि निजी प्रकाशकों की पांच प्रमुख विषयों की किताबों में प्रत्येक का मूल्य 150 रुपये से भी अधिक ही है। एनसीईआरटी की किताबों का जो सेट 250 रुपये में हैं, निजी प्रकाशकों के किताबों का सेट ढाई से चार हजार रुपये में पड़ रहा है।

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