नैनीताल: हिमालय में जलस्रोतों के पास मिले औषधीय गुणों से भरपूर दो कवक, उर्वरक क्षमता व जैविक खाद बनाने में होंगे सहायक
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गौरव जोशी, नैनीताल, अमृत विचार। हिमालयी रीजन में जल स्रोतों के पास मौजूद पौधों की जड़ में एंटीबैक्टीरियल कवक मिले हैं। सामान्य तौर पर पानी के पास उगने वाले पौधे समय से पहले ही सड़-गल जाते हैं। कुमाऊं विवि के शोध में पहली बार औषधीय गुण वाले पौधे मिलने से वनस्पति विज्ञानी उत्साहित हैं।
जड़ों में लगने वाली फफूंद में यह गुण मिले हैं। डीएसबी परिसर स्थित वनस्पति विज्ञान विभाग ने हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले जल स्रोतों के जलीय कवकों पर छह वर्षों तक अध्ययन किया। इसमें दो नए कवक मिले हैं इनके वैज्ञानिक नाम टूर्वक्लेडियम इंडिकम एवं प्लूरो पेडियम ट्राइक्लाडियोइड्स हैं।
शोधार्थी डॉ. अंजलि कोरंगा बताती हैं कि जलीय कवक विशेष रूप से जड़ों में अंतःजीवी के रूप में पाए जाते हैं। ये कवक पौधों के स्वास्थ्य के साथ ही मनुष्यों के लिए भी एंटीऑक्सीडेंट का काम करेंगे। ये कवक मिट्टी की ताकत भी बढ़ाएंगे। कवक विशेषज्ञों के अनुसार यह शोध कृषि के क्षेत्र में भी उपयोगी साबित होने वाला है। इसे मिट्टी में मिलाकर भूमि की उर्वरता को बढ़ाया जा सकता है। जबकि इससे जैविक खाद का उत्पादन भी किया जा सकेगा।
कैंसर और डायबिटीज रोकने में होगा मददगार
इसके एंटीऑक्सीडेंट इंसानों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं। इसके अलावा कैंसर का जोखिम कम करने, डायबिटीज और हृदय रोगों को नियमित करने में भी इसकी भूमिका हो सकती है। बुढ़ापे के लक्षणों को कम करने में भी एंटीऑक्सीडेंट मददगार साबित होते हैं। इसलिए शोध में मिले अंत:जीवी जलीय कवक पर अभी विस्तृत शोध करने की जरूरत है।
हिमालयी रीजन में पहली बार दो नए कवक खोजे गए हैं। साथ ही रिसर्च में किया गया अंत: जीवी जलीय कवक का कार्य अत्यंत उपयोगी है। इससे आने वाले समय में भूमि की उर्वरता बढ़ाने में काफी कारगर सिद्ध होगी।
-प्रो. एससी सती, पूर्व विभागाध्यक्ष एवं संकाय वनस्पति विज्ञान विभाग, कुविवि