अनिवार्य आवश्यकता

अनिवार्य आवश्यकता

जलवायु परिवर्तन दुनिया के हर देश को प्रभावित करता है। इसलिए यह सबका कर्तव्य है कि मिलकर इस दिशा में पहलकदमी करें। जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण कार्बन उत्सर्जन है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टूर्क ने चेतावनी दी है कि आपात जलवायु हालात के दौरान, अपर्याप्त कार्रवाई के कारण मानवता के लिए जीवन का …

जलवायु परिवर्तन दुनिया के हर देश को प्रभावित करता है। इसलिए यह सबका कर्तव्य है कि मिलकर इस दिशा में पहलकदमी करें। जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण कार्बन उत्सर्जन है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टूर्क ने चेतावनी दी है कि आपात जलवायु हालात के दौरान, अपर्याप्त कार्रवाई के कारण मानवता के लिए जीवन का बुनियादी अधिकार ही ख़तरे में है। जलवायु परिवर्तन के कारण लोग अपने घर, आजीविका और जान गंवा रहे हैं।

फिलहाल तापमान वृद्धि की गति को देखते हुए हमारे बच्चों के जीवन काल में ही विश्व के कई हिस्से रहने योग्य नहीं रहेंगे और इसके अकल्पनीय परिणाम होंगे। हाल ही में पाकिस्तान में आई भयंकर बाढ़ ने तीन करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित किया है। इस अकेली आपदा के असर को समझने और पुनर्निर्माण में अनेक वर्ष लग जाएंगे। सन 1990 में जलवायु परिवर्तन की चुनौती को पहचाना गया और संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) की प्रक्रिया शुरू की गई।

संयुक्त राष्ट्र का 27वां जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप) शनिवार से मिस्र के शर्म अल-शेख में होगा। सम्मेलन अफ्रीका में पांचवीं बार आयोजित होगा। इसमें 200 से अधिक देशों को आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन में तीन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें उत्सर्जन कम करना, जलवायु परिवर्तन से निपटने, तकनीकी सहायता और विकासशील देशों को जलवायु गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद करना शामिल है।

वर्ष 1995 में बर्लिन में आयोजित कॉप में विकसित देशों की अनिवार्य आवश्यकता को केंद्र में रखा गया और विकासशील देशों को यह कहते हुए रियायत दी गई कि विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अभी भी कम है और इन देशों की सामाजिक तथा विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वे अपने हिस्से का उत्सर्जन कर सकते हैं।

दरअसल भारत के अलावा बड़े उत्सर्जक प्रतिबद्धता को लेकर गंभीर नहीं हैं। परंतु वर्तमान आर्थिक और भूराजनीतिक माहौल में जिम्मेदारियों को उत्तरदायित्व एवं कर्तव्य के रूप में साझा करके अन्य देशों के लिए गुंजाइश छोड़ने की बात को प्रमुख उत्सर्जक स्वीकार नहीं करेंगे।

भारत इस पर जोर देकर यह सुनिश्चित कर सकता है कि यूएनएफसीसीसी का एजेंडा बरकरार रहे तथा जलवायु से जुड़े जोखिमों के पीड़ित देशों में से अधिकांश साथ आएं। जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को मानवाधिकारों पर केन्द्रित रखना होगा। सम्मेलन में भारत को इस बात पर जोर देना चाहिए कि जलवायु संबंधी कदमों में जवाबदेही के सिद्धांत तथा निष्पक्षता को आधार बनाकर काम किया जाए।

ताजा समाचार

Donald Trump Tariffs Announcement: ट्रम्प के टैरिफ का टूटा कहर, सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
Kanpur: ट्रेन में बिगड़ी हालत तो भाई को मिलाया फोन, हो गई मौत, परिजनों में मचा कोहराम
Wakf Amendment Bill : सोनिया गांधी ने वक्फ संशोधित बिल को बताया संविधान पर हमला, बोलीं- याचिका को किया गया नजरअंदाज
Kanpur: पुलिस हिरासत में शातिर अपराधी ने ब्लेड से काटी गर्दन, हालत गंभीर, हैलट अस्पताल में कराया गया भर्ती
Bahraich News : जमीन कब्जाने के आरोप में भाजपा नेता समेत तीन नामजद और 100 अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज
सफर हुआ महंगा...बरेली से दिल्ली और लखनऊ रूट पर बसों का बढ़ा किराया, जानें अब कितने खर्च करने होंगे?