Kanpur: हैलट में शुरू हुई रेटिना की जटिल सर्जरी, मरीजों को होगी सुविधा, इन विधियों से होंगे ऑपरेशन...
कानपुर, अमृत विचार। रेटिना की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह खबर राहत भरी है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में तीन विधियों से रेटिना के ऑपरेशन की सुविधा शुरू हो गई है। कई मरीजों के ऑपरेशन सफलता पूर्वक किए जा चुके हैं। अभी तक हैलट अस्पताल की ओपीडी में रेटिना में दिक्कत वाले तमाम मरीज पहुंचते थे, इन्हें दवा के माध्यम से ठीक करने का प्रयास किया जाता था या उन्हें निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराने की सलाह दी जाती थी।
नेत्र रोग विभाग के डॉ. परवेज खान ने बताया कि रेटिना का ऑपरेशन आइरिस, स्क्लेरल और गूल्ड आईओएल विधि से किया जा रहा है। निजी अस्पताल में रेटिना के ऑपरेशन पर कम से कम 40 से 50 हजार रुपये खर्च आता है। लेकिन हैलट अस्पताल में अधिकतम खर्च 10 हजार रुपये है। यह राशि भी इसलिए चुकानी पड़ती है, क्योंकि लगाया जाने वाला लेंस मरीज को खरीदना पड़ता है।
मरीजों की हर समस्या का समाधान
मोतियाबिंद जब काफी पुराना हो जाता है और आंखों के अंदर का कैप्सूल फट जाता है तो ऑपरेशन काफी मुश्किल होता है। इस स्थिति में आंखों में लेंस भी नहीं लग पाता है। ऐसे में मरीज की आंखों की रोशनी बचाना मुश्किल होता है। इसके अलावा जब आंखों के पर्दे की झिल्ली फट जाती है तो भी ऑपरेशन मुश्किल होता है। लेंस गिर जाने की स्थिति में भी आंखों की रोशनी चली जाती है। लेकिन अब इन सब समस्याओं का भी इलाज अस्पताल में संभव है।
इन लक्षणों पर हो जाएं सावधान
- अलग सी रोशनी की किरणें या धागे जैसी हिलने वाली वस्तुएं दिखना।
- आंख के किनारों से वस्तुएं अंधेरी जैसी दिखना या उनका धुंधला दिखाई देना।
- आंख में किसी प्रकार चोट लगने की वजह से भी रेटिना में दिक्कत होती है।
- आनुवांशिक कारणों की वजह से भी आंख की रेटिना पर काफी असर पड़ता है।