हल्द्वानी: कुमाऊं के दुर्गम इलाकों में ड्रोन पहुंचाएगा दवा

हल्द्वानी, अमृत विचार। ऋषिकेश एम्स की तर्ज पर अब हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज प्रशासन कुमाऊं के दुर्गम क्षेत्रों में मरीजों को ड्रोन से दवा पहुंचाने की कवायद में जुट गया है। इसका लाभ आपात स्थिति में फंसे लोगों को भी मिलेगा। यह कुमाऊं के लोगों के लिए रामबाण साबित होगा।
सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और आपात स्थिति में दवाइयां पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने ड्रोन डिलीवरी शुरू की है। उत्तराखंड के ऋषिकेश एम्स में ड्रोन डिलीवरी का पहला परीक्षण हुआ जो पूरी तरह सफल रहा। अब इसे कुमाऊं में शुरू करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेष (एम्स) के निदेशक को पत्र लिखकर ड्रोन डिलीवरी के संबंध में स्पेशिफिकेशन व जेम बिड प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। जानकारी मिलते ही जेम के प्लेटफार्म पर ड्रोन का ऑर्डर दिया जाएगा। इसके लिए बजट केंद्र सरकार देगी।
कोटाबाग सीएचसी होगा परीक्षण सेंटर
कुमाऊं में ड्रोन डिलीवरी शुरू करने के लिए पहले इसका परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए कोटाबाग के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को सेंटर बनाया गया है। परीक्षण सफल होने के बाद धीरे-धीरे ड्रोन डिलीवरी में विस्तार होगा। इससे नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत जनपद के दुर्गम इलाकों में मरीजों को समय रहते दवा पहुंच जाएगी।
ड्रोन से जांच के लिए सैंपल आएंगे एसटीएच
ड्रोन के माध्यम से दूरस्थ इलाकों के सीएचसी स्तर के अस्पतालों को दवाओं के साथ-साथ डायग्नोस्टिक किट और ब्लड सैंपल आदि भेजे जाएंगे। ड्रोन सेवा से टेलीमेडिसिन कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों को ही जोड़ा जाएगा। दूरस्थ इलाकों से मरीजों के सैंपल ड्रोन के जरिये हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज लाए जाएंगे। यहां लैब में जांच की जाएगी। इसके बाद मरीजों को टेलीमेडिसिन या ऑनलाइन माध्यम से जानकारी दी जाएगी।
ड्रोन डिलीवरी केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। ड्रोन खरीदने के लिए सरकार पैसा देगी। परीक्षण के लिए कोटाबाग सीएचसी को सेंटर बनाया गया है। प्रयोग सफल होने के बाद इसमें विस्तार होगा। यह मरीजों के लिए रामबाग होगा।
- डॉ. आरजी नौटियाल, प्रभारी प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी