नैनीताल:  नैनी झील से करीब 20 क्विंटल कॉमन कार्प और बिग हेड मछलियां बाहर निकालीं 

नैनीताल:  नैनी झील से करीब 20 क्विंटल कॉमन कार्प और बिग हेड मछलियां बाहर निकालीं 

नैनीताल, अमृत विचार।  नैनी झील के लिए खतरनाक साबित हो रही कॉमन कार्प और बिग हेड मछलियां को झील से निकाले जाने का अभियान दो सप्ताह तक चलाए जाने के बाद अब समाप्त हो गया है। पंतनगर विश्वविद्यालय के मत्स्य विभाग के तत्वाधान में चल रहे अभियान के तहत नैनी झील से करीब 18 क्विंटल मछलियां बाहर निकलीं गईं।

जानकारी देते हुए लेक एरिएसन सुपरवाइजर आनंद कोरंगा ने बताया अभियान के तहत नैनी झील से करीब 18 क्विंटल बिग हेड और 2 क्विंटल कॉमन कार्प मछलियां झील से निकाल कर अनुसंधान के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय भेजी गई हैं।

आनंद सिंह कोरंगा ने बताया नैनी झील में करीब 60% के आसपास कॉमन कार्प और बिग हेड मछलियां हैं जो नैनीताल के पारिस्थितिकी तंत्र  के लिए खतरनाक है।

इन मछलियों को 1 सितंबर से झील से निकलने का काम प्रारम्भ किया गया था। जिला विकास प्राधिकरण ने झील से मछलियां निकालने के लिए रुद्रपुर की बायो मैनिपुलेशन को 26 लाख 45 हजार ठेका दिया था। जिन्होंने नैनी झील में एक किलो से अधिक की मात्रा वाली बिग हेड और कॉमन कार्प मछलियों को निकालने का काम किया।

नैनी झील के अस्तित्व के लिए कॉमन क्राप मछलियां बेहद खतरनाक
पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला था कि नैनी झील के अस्तित्व के लिए कॉमन क्राप मछलियां बेहद खतरनाक है जिन्हें निकाले जाने की आवश्यकता है। वर्ष 2008 में नैनी झील से खतरनाक प्रजाति की कॉमन क्राप मछलियों को निकालने का काम किया गया था जो कुछ दिन चलने के बाद रुक गया। तो वहीं बीते वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल द्वारा नैनी झील के लिए करवाए गए सर्वे के आधार पर एक बार फिर झील से खतरनाक कॉमन कार्प मछलियों को निकालने के निर्देश दिए गए थे।

पंत विश्व विद्यालय के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में बताया कि झील में कॉमन कार्प मछली भोजन की तलाश में नैनी झील की सुरक्षा दीवारों को लगातार खोद रही है जिससे झील के किनारे की दीवारों और पहाड़ियों पर भूस्खलन हो रहा है। लिहाजा इन मछलियों को झील से निकल जाना बेहद आवश्यक है। कॉमन कार्प  मछली की प्रजाति दूसरी प्रजाति को अपने साथ पनपने भी नही देती जो नैनी झील के लिए चिंता का विषय है। कॉमन कॉर्प प्रजाति की वजह से नैनी झील में कार्बन, नाइट्रोजन और फास्फोरस भी बढ़ रहा है। जो कि झील की सेहत के लिए ठीक नहीं।

झील से मछलियों को निकल जाने का प्रथम चरण का अभियान पूर्ण हो चुका है। इस दौरान करीब 20 कुंतल मछलियां नैनी झील से निकल गई है।दूसरा चरण का अभियान अब नवंबर माह में प्रारंभ किया जाएगा।
-आंनद सिंह कोरंगा, सुपरवाइजर

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