बरेली: पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों के कटान पर जताई चिंता, कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

बरेली: पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों के कटान पर जताई चिंता, कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

अमृत विचार, बरेली। विश्व पर्यावरण दिवस से एक दिन पहले पर्यावरण प्रेमियों ने बरेली कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारी को पेड़ों के लगातार हो रहे कटान पर चिंता जाहिर करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। समाजसेवी और बरेली कॉलेज में विधि विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार के नेतृत्व में कई पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा …

अमृत विचार, बरेली। विश्व पर्यावरण दिवस से एक दिन पहले पर्यावरण प्रेमियों ने बरेली कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारी को पेड़ों के लगातार हो रहे कटान पर चिंता जाहिर करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। समाजसेवी और बरेली कॉलेज में विधि विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार के नेतृत्व में कई पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बरेली स्मार्ट सिटी में विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर पहले पेड़ों को काटा जा रहा है, उसके बाद हर कच्ची भूमि को सीमेंट कंक्रीट और टाइल्स लगाकर पक्का किया जा रहा है।

जिससे शहर में पाकड़, पीपल, बरगद और नीम जैसे तमाम देसी और छायादार पेड़ों को लगाने की संभावाओं को भी खत्म किया जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों ने ज्ञापन में चिंता जताते हुए कहा दशमलव जीरो एक फीसदी वन क्षेत्र वाले बरेली महानगर में छायादार पेड़ों को उजाड़कर 6-7 फीट चौड़े डिवाइडर बनाए जा रहे हैं, जब इस भूमि को ऐसे ही बर्बाद करना था, तो पेड़ों का काटा जाना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई आज भी जारी है, लेकिन उनके ट्रांसलोकेट की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, पेड़ लगाने से ज्यादा जरूरी तैयार पेड़ों का संरक्षण करना है।

साथ ही भू-गर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि शहर को अति दोहित श्रेणी में रखा गया है। शहर में तेजी से नीचे जा रहे भू-गर्भीय जल स्तर की स्थिति भयानक बनी हुई है। जिसकी वजह से बरेली के 4 विकास खंड क्षेत्र पहले से डार्क जोन घोषित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही गैर कानूनी तरीके से शहर के सीवर और गंदे नालों के पानी से शहर से गुजरने वाली किला और नकटिया नदियों का भी जीवन खतरे से बाहर नहीं है। वहीं उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण को महज कागजों और कार्यालयों में ही नहीं मनाया जाना चाहिए, बल्कि धरातल पर पेड़ों को लगाकर और उनके संरक्षण के साथ मनाना बेहतर होगा।

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