Video : तंबाकू के विज्ञापन वाले मुकेश की असली कहानी जानते हैं आप? 

Video : तंबाकू के विज्ञापन वाले मुकेश की असली कहानी जानते हैं आप? 

मुंबई। जब भी आप थिएटर में मूवीज देखने जाते हैं तो फिल्म शुरू होने से पहले तंबाकू अवेयरनेस को लेकर कुछ वीडियो दिखाए जाते हैं। इन वीडियो में आपने देखा होगा कि मुकेश हराने की कहानी दिखाई जाती है और बताने की कोशिश की जाती है कि सेहत के लिए तंबाकू किस तरह खतरनाक है।

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लंबे समय से बड़े पर्दे पर दिखाए जा रहे इस वीडियो का काफी मजाक भी बनाया जा रहा है और सोशल मीडिया पर मुकेश हराने को लेकर भी काफी मजाक की जाती है। सोशल मीडिया पर मुकेश हराने को लेकर कई मीम भी शेयर किए जाते हैं। इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि मुकेश हराने एक मॉडल हैं, जिन्हें इस वीडियो के लिए कास्ट किया गया था। 

साथ ही ये तथ्य भी शेयर किए जाते हैं कि मुकेश हराने की यह सच्ची कहानी है और वो भी तंबाकू खाने के बाद बीमार हो गए थे। ऐसे में जानते हैं कि आखिर मुकेश हराने की क्या सच्चाई है और असल जिंदगी में मुकेश हराने कौन हैं और उनकी असल जिंदगी कैसी है।

मुकेश हराने कोई मॉडल नहीं हैं और यह असल कहानी है। ये वीडियो उसी वक्त शूट किया गया था, जब वे अस्पताल में कैंसर का इलाज करवा रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकेश हराने महाराष्ट्र के भुसावाल के रहने वाले थे और साल 2009 के अक्टूबर में उनकी मौत हो गई थी। जब वे अस्पताल में एडमिट थे, उस वक्त उनका वीडियो शूट किया था, जिसमें वो अपनी कैंसर की जर्नी को बता रहे थे। इस वीडियो को ही कैंसर अवेयरनेस आदि के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उनका मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में इलाज चला था। 

उन्होंने अपनी कहानी में बताया था कि वो तंबाकू की लत से परेशान थे और उनकी मां इसके लिए उन्हें काफी डांटती भी थी। मुकेश अपने परिवार में कमाई का अकेला जरिया था और उनके पिता मजदूर थे। बताया जाता है कि मुकेश ने 24 साल की उम्र में दम तोड़ दिया था और सिर्फ एक साल पहले ही उन्होंने तंबाकू खाना शुरू किया था। इसके बाद एक साल में उनकी मौत हो गई। ऐसे में अगर साफ है कि मुकेश की कहानी असली थी और उन्हें मॉडल बताने वाले तथ्य सही नहीं है। साथ ही जिन दावों में कहा जाता है कि मुकेश हराने जिंदा है, वो तथ्य भी गलत हैं। 

हालांकि, मुकेश हराने की मौत को लेकर कई तरह की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। एक रिपोर्ट में बताया गया था कि मुकेश हराने की मौत कैंसर की वजह से नहीं बल्कि फूड पाइप इंफेक्शन की वजह से हुई थी और उनके परिवार वाले दावा करते हैं कि उन्हें कैंसर नहीं है। 

साल 2012 में नेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर टोबैको इरडिकेशन (नोट) ने देशभर के सभी सिनेमाघरों में मुकेश और स्पंज के विज्ञापन को फ़िल्म प्रर्दशन के दौरान अनिवार्य कर दिया था, जिसे अक्टूबर 2013 जारी रखा गया. आज भी देश के कई कई सिनेमाघरों में मुकेश का विज्ञापन दिखाया जाता है। 

WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दुनियाभर में प्रतिवर्ष तंबाकू के सेवन से 60 लाख लोगों की मौत हो जाती है। भारत में इसकी तादात सबसे अधिक है। 

साल 2009 में भारत में जब तंबाकू विरोधी अभियान के लिए एक विज्ञापन बनाया जा रहा था तब मुकेश मुंबई के अस्पताल में भर्ती थे।  इस दौरान मुकेश के परिवार से उनका वीडियो इस विज्ञापन में शामिल करने की अनुमति ली गई थी। जब मुकेश की वीडियो ग्राफ़ी के लिए अनुमति ली गई तब उनके पास कहने के लिए बेहद कम शब्द थे। 

वीडियो में मुकेश कहते हैं, मेरा नाम मुकेश है। मैंने सिर्फ एक साल गुटखा चबाया और मुझे कैंसर हो गया। मेरा ऑपरेशन हुआ है।  शायद में इसके आगे बोल नहीं सकूंगा। ये मुकेश के आख़िरी शब्द थे।

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