2024 तक बनेंगे 26 ग्रीन एक्सप्रेस-वे, गडकरी का दावा- भारत का रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर अमेरिका को देगा टक्कर

नितिन गडकरी ने कहा, इस समय एनएचएआई की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत है।

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नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में बताया कि वर्ष 2024 खत्म होने से पहले देश में 26 ग्रीन एक्सप्रेस हाइवे बनाए जाएंगे। इन पर 125-130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफर पूरा होगा। उन्होंने दावा किया कि 2024 खत्म होने से पहले तक देश का रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर अमेरिका की टक्कर का होगा।

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नितिन गडकरी ने कहा, इस समय नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत है। मैं सदन में ऑन-रिकॉर्ड यह बात कह रहा हूं कि मैं हर साल 5 लाख करोड़ रुपए की सड़क बना सकता हूं। हमारे पास पैसे की कमी नहीं है। संसद में किसी भी पार्टी के सांसद से पूछिए, जिसने भी मुझसे सड़क बनवाने के लिए पैसा मांगा है, मैंने उसे पैसा सैंक्शन किया है। मैंने किसी पार्टी के सांसद को मना नहीं किया।

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उन्होंने कहा, नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को ‘एएए’ रेटिंग मिली हुई है। हाल ही में दो बैंकों के चेयरमैन मेरे पास आए और उन दोनों ने मुझे 25-25 हजार करोड़ रुपए लोन देने का प्रस्ताव रखा। मुझे सिर्फ 6.45 प्रतिशत की ब्याज दर पर यह पैसा मिला है। इसलिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास सड़कें बनवाने के लिए भरपूर पैसा है।

गडकरी ने कहा कि फिलहाल टोल कलेक्ट करने के लिए हमारे पास एक सिस्टम मौजूद है, लेकिन हम दो विकल्पों पर काम कर रहे हैं। पहला है सैटलाइट आधारित टोल-सिस्टम जिसमें कार में जीपीएस लगा होगा और उसमें से खुद ही टोल कट जाएगा।

दूसरा सिस्टम है- नंबर प्लेट में बदलाव करना। 2019 से ही हमने नए तरीके की नंबर प्लेट बनाने की तकनीक पर काम करना शुरू कर दिया है। अब मैन्युफैक्चरर के लिए यह नंबर-प्लेट लगाना अनिवार्य होगा। पुरानी नंबर-प्लेट्स को नई नंबर प्लेट्स से बदला जाएगा। नई नंबर-प्लेट से एक सॉफ्टवेयर जुड़ा होगा, जिससे टोल कट जाया करेगा।

नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया भारत सरकार की एक स्वायत्त संस्था है। इसे 1955 में स्थापित किया गया था। यह देश के 1,32,499 किमी लंबे नेशनल हाईवे में से 50 हजार किमी के नेटवर्क के मैनेजमेंट का काम देखती है।

नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया का काम है अम्ब्रेला हाईवे योजना, भारतमाला योजना के लिए फंड देना। इसका उद्देश्य एनएच लिंकेज वाले जिलों की संख्या को 300 से बढ़ाकर 550 करना है। इसके अलावा सड़क के किनारे रेस्टरूम, फूड प्लाजा और मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था करना और पौधरोपण करना भी इसी संस्था की जिम्मेदारी है।

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