सफल सम्मेलन

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विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंत्री स्तरीय जिनेवा सम्मेलन की उपलब्धियों से सिद्ध हो गया कि भारत दुनिया के देशों के बीच आम सहमति बनाने और अपने लिए हर तरह से फायदे का सौदा पाने में सक्षम है। सम्मेलन में भारत ने विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को आगे रखा। यह गर्व की बात है कि भारत ने डब्ल्यूटीओ का एजेंडा तय किया। जहां तक नतीजों का सवाल है तो इसमें लगभग सभी मसलों पर सहमति बनी सिवाय खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण के।

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कृषि से संबंधित मसले जैसे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब कोई चिंता नहीं है। भारत ने अनाज के सार्वजनिक भंडारण के लिए किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं किया। कुल मिलाकर सम्मेलन सफल नतीजों वाला रहा। डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक नगोजी ओकोंजो-इवेला ने कहा कि जो समझौते हुए हैं वे अप्रत्याशित हैं और दुनिया भर के लोगों की जिंदगी में बदलाव लेकर आएंगे। यह दर्शाता है कि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के जरिए वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में डब्ल्यूटीओ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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यानि डब्ल्यूटीओ के सदस्य साथ आकर दुनिया की साझा चिंताओं को दूर करने में सक्षम हैं। विश्व व्यापार संगठन एकमात्र वैश्विक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के मध्य व्यापार नियमों से संबंधित है। भारत डब्ल्यूटीओ का संस्थापक सदस्य है। विश्व व्यापार संगठन संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी नहीं है लेकिन स्थापना के बाद से ही इसने संयुक्त राष्ट्र एवं संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के साथ मज़बूत संबंध स्थापित किए हैं।

12 मंत्री स्तरीय सम्मेलन में डब्ल्यूटीओ के 164 सदस्य देशों के बीच चले विचार-विमर्श के बाद कोविड-19 टीकों के लिए अस्थायी पेटेंट छूट पर सहमति बनी। इससे भविष्य में महामारी पर तेजी से प्रतिक्रिया होगी और महामारियों में व्यापार अवरोध कम होंगे। साथ ही मछलीपालन के लिए मिलने वाली सब्सिडी, खाद्य सुरक्षा और कृषि के अलावा डब्ल्यूटीओ में सुधार को लेकर आखिरकार समझौता हो गया। भारत ने अपने हित को ऊपर रखा और अंत तक उससे पीछे नहीं हटा।

सम्मेलन की समाप्ति पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत आज विभिन्न मुद्दों पर भयभीत होने के बजाय फ्रंट फुट पर बल्लेबाजी करता है, चाहे पर्यावरण हो, स्टार्टअप हो, एमएसएमई या लैंगिक समानता। कहना उचित है कि विश्व व्यापार संगठन में भारत के रुख से दुनिया भर में गरीबों और कमजोर लोगों की आवाज मजबूत हुई। सुधारों पर तय किया गया एजेंडा विश्व व्यापार संगठन को अधिक कुशल एवं चुस्त निकाय बनाएगा। विवाद निपटान निकाय को पुनर्जीवित किया जाएगा जो व्यापार विवादों को निपटाने में अपनी अपेक्षित भूमिका निभाएगा।

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