Russia-Ukraine War : ‘यूक्रेन पर रूसी आक्रमण जल्द खत्म होने वाला नहीं, पुतिन को पश्चिम का ध्यान हटने का इंतजार’

Advertisement

सिडनी। यूक्रेन पर आक्रमण को लेकर रूस के लिए सांप छछूंदर वाली स्थिति बन गई है, पश्चिमी नेताओं को धीरे-धीरे व्लादिमीर पुतिन के दो इरादों के बारे में भनक लगने लगी है। सबसे पहले, यूक्रेन के खिलाफ रूस का युद्ध जल्द खत्म नहीं होगा, और निकट भविष्य में इसके और बढ़ने की संभावना है। दूसरा, ऐसे भविष्य की कल्पना करने की कोशिश करना व्यर्थ है जिसमें मास्को के साथ संबंधों में आपसी अविश्वास और शत्रुता के अलावा कुछ और होगा। इसके बावजूद, अभी भी संभावना है कि कठिन वास्तविकताओं से निपटने की पश्चिमी देशों की अक्षमता के कारण रूस का आक्रमण अंतरराष्ट्रीय रडार से हट जाए।

Advertisement

पुतिन के विस्तार का युद्ध
एक जर्मन अखबार के साथ एक साक्षात्कार में, नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने अनुमान लगाया कि युद्ध में महीनों के बजाय वर्षों लग सकते हैं। ब्रिटिश सेना के भावी प्रमुख पैट्रिक सैंडर्स ने दावा किया है कि ब्रिटेन के सशस्त्र बलों को रूस के साथ जमीनी युद्ध लड़ने के लिए उन्मुख होने की आवश्यकता है। और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन के लिए अपना स्पष्ट समर्थन दिया है। लेकिन इस सब के बावजूद पुतिन के लिए विस्तृत राजनयिक “ऑफ रैंप” का सपना देखने का कोई मतलब नहीं है, जब यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि उन्हें इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। यह तो 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले ही तय लग रहा था कि क्रेमलिन यूएसएसआर के भू-रणनीतिक स्वरूप के नजदीक कुछ हासिल करने से कम में संतुष्ट होने वाला नहीं है।

Advertisement

इस बात को व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में स्वीकार किया जब उन्होंने खुद की तुलना पीटर द ग्रेट से की, यह देखते हुए कि “अब हमारी जमीन वापस पाने की हमारी बारी है”। इतना तो तय है, पुतिन के शब्दों से उस अत्यधिक अतिरंजित दावे पर विराम लग जाना चाहिए कि पश्चिमी सुरक्षा संरचनाओं के विस्तार ने पुतिन को यूक्रेन पर आक्रमण करने के लिए मजबूर किया। यह स्पष्ट रूप से रूसी विस्तार का युद्ध है, नाटो के विस्तार का नहीं।

पश्चिम का इंतजार कर रहे पुतिन
एक और कारण है कि पश्चिम को पुतिन के हाथ उमेठने के प्रलोभन से बचना चाहिए क्योंकि अब यूक्रेन के रूसी आक्रमण को पीछे हटाने के प्रयासों के लिए सबसे खतरनाक समय है। उसके स्वयं के अनुमान के अनुसार, यूक्रेन की सेनाएं डोनबास क्षेत्र में रूसी तोपखाने द्वारा दस-से-एक के अनुपात पर बढ़त बनाए हैं। हालांकि, यूक्रेन के पास राष्ट्रीय अस्तित्व के लिए और शांति की पैरवी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है – रूसी आक्रमणकारियों द्वारा यूक्रेनियन पर की गई बर्बरता के बारे में हम जो जानते हैं उसे देखते हुए – इसका मतलब ज़ेलेंस्की की सरकार का शीघ्र अंत होगा। शुरुआत में खराब रणनीति के कारण राजधानी कीव पर कब्जा करने में विफल होने के बाद, रूसी सेना ने आक्रामक अभियानों के लिए अपना विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाया है – शहरी और ग्रामीण दोनों वातावरणों में बड़े पैमाने पर अंधाधुंध बमबारी।

बमबारी की यह बौछार उसकी सेना को आगे बढ़ने में मदद कर रही है, भले ही यह गति धीमी और दर्दनाक है। यह कम से कम फिलहाल के लिए पुतिन के लिए ठीक है। उनके पास बातचीत की मेज पर जाने के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं है क्योंकि यूक्रेन से अब तक उसने जो सीमित क्षेत्र जब्त किया है, उसे देश या विदेश में एक बड़ी जीत के रूप में नहीं देखा जा सकता है। उनकी सैन्य गणना सरल है: क्षेत्र पर कब्जा करना जारी रखना और जितना संभव हो उतना यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को नष्ट करना। यह उनकी रणनीतिक गणना के साथ भी मेल खाता है, जो कि बस पश्चिम की प्रतीक्षा करना है।

पहले – चेचन्या, जॉर्जिया और क्रीमिया में – उन्होंने सही अनुमान लगाया है कि लंबे समय तक टकराव के प्रति पश्चिमी सहिष्णुता कम है, और इस मामले में भी यही रणनीति अपनाई जा सकती है। वर्तमान में पश्चिमी नेताओं के लिए यह घोषणा करना फैशनेबल है कि वे मदद के लिए कितना कर रहे हैं, वास्तविकता यह है कि वे सुरक्षित रूप से यूक्रेन को एक बड़ी शक्ति से लड़ते हुए देख रहे हैं।

यूक्रेन सेना ने दोनेत्स्क के करीब 45 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण का किया दावा
यूक्रेन की सेना ने दावा किया है कि दोनेत्स्क का करीब 45 फीसदी हिस्सा उसके कब्जे में है। यूक्रेन के ऑनलाइन समाचार पत्र यूक्रेइंस्का प्रावदा ने बताया कि दोनेत्स्क ऑब्लास्ट सेना प्रशासन के प्रमुख पावलो किरीलेंको बुधवार को स्थानीय मीडिया को कहा कि रूस के नियंत्रण वाला दोनेत्स्क का 55 फीसदी हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया है। किरीलेंको ने कहा कि दोनेत्स्क के पूरी मोर्चे पर स्थिति बहुत गंभीर है और रूस की सेना उपलब्ध सभी हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने बताया कि वहां रह रहे लोग कह रहे हैं कि उनके पास जाने की कोई जगह नहीं है और न ही उनके पास इतने पैसे हैं कि वे दूसरी जगह जा सकें। सैन्य अधिकारी ने बताया कि दोनेत्स्क में फंसे अधिकतर नागरिक लगातार हो रहे हवाई हमलों के कारण बम शेल्टर में छुपे हैं।

ये भी पढ़ें : Sri Lanka Crisis: पीएम विक्रमसिंघे ने संसद में कहा- भारतीय सहायता ‘धर्मार्थ दान’ नहीं

Advertisement
Related

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.