उचित पहल

कोरोना महामारी के कारण पूरे विश्व को आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ा। महामारी ने मांग और आपूर्ति दोनों को प्रभावित किया। यह दौर वैश्विक वित्तीय संकट से भी अधिक गंभीर रहा। महामारी के असर से देश की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए एक विशिष्ट और उपयुक्त दृष्टिकोण अपनाया गया। भारत ने जिन चार आयामों वाली रणनीति को अपनाया, उनमें महामारी पर नियंत्रण, वित्तीय नीति और लंबी अवधि के संरचनात्मक सुधार शामिल रहे।

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सरकारी खपत और निर्यात ने विकास दर में और कमी नहीं आने दी, जबकि निवेश और निजी क्षेत्र खपत ने विकास दर को कम किया। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पहल की गई। इसके लिए निर्यात किए जाने वाले उत्पादो से करों और शुल्कों में छूट की घोषणा की गई। अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सरकार का नजरिया स्थानीय विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने का रहा। इसी के मद्देनजर पिछले दिनों घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने विभिन्न मंत्रालयों को 102 उत्पादों की सूची जारी करके आयात कम करने के लिए निर्देश दिए हैं। इन एक सौ दो वस्तुओं की देश के कुल आयात में 57 प्रतिशत से अधिक की भागीदारी है।

इनमें से अठारह वस्तुएं ऐसी हैं, जिनका आयात लगातार बढ़ रहा है, जबकि अपने देश में उनके उत्पादन की भरपूर संभावनाएं हैं। जिन वस्तुओं के आयात में कटौती की सलाह दी गई है, वे मुख्य रूप से कोकिंग कोयला, कुछ मशीनरी उपकरण, रसायन और डिजिटल कैमरा शामिल हैं।

सरकार वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनने का नारा दे चुकी है। इस दिशा में पहले ही बाहर से मंगाई जाने वाली कई वस्तुओं में कटौती की जा चुकी है। ताजा फैसला उससे आगे की कड़ी है। काफी समय से इस बात को लेकर चिंता जताई जाती रही है कि देश में अयात तो बढ़ रहा है, पर निर्यात लगातार घट रहा है। सूची में शामिल कुछ वस्तुएं ऐसी हैं, जिनका अपने देश में भी उत्पादन भरपूर होता है। मगर आयातित माल की वजह से उन्हें घरेलू बाजार में उचित भागीदारी नहीं मिल पाती।

इस मामले में वाणिज्य मंत्रालय का यह फैसला उचित है कि उसने आयात के मामले में कुछ वस्तुओं को चिह्नित कर उनकी जगह देशी वस्तुओं की पहुंच सुनिश्चित करने की पहल की है। भारत की जनसांख्यिकी हमारी ताकत है, जो आत्मनिर्भर भारत के लिए ऊर्जा का स्रोत है। भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार और मांग है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है ताकि भारत दुनिया के विकसित देशों के साथ कारोबारी होड़ में शामिल रह सके।

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