पेलोसी की यात्रा

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ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के संबंधों में जबरदस्त तनाव है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने ताइवान दौरे में साफ कर दिया कि अमेरिका सुरक्षा के मुद्दे पर ताइवान के साथ खड़ा है। पेलोसी की इस यात्रा से चीन बौखला गया है। चीन ने ताइवान-अमेरिका को देख लेने की धमकी दी है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन के साथ मुलाकात में पेलोसी ने कहा कि आज विश्व के सामने लोकतंत्र और निरंकुशता के बाद बीच एक को चुनने की चुनौती है।

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एशिया की यात्रा के तहत पेलोसी का सिंगापुर, मलेशिया और जापान जाने का भी कार्यक्रम है। वहीं, चीन के उप विदेश मंत्री शी फेंग ने कहा कि चीन के विरोध के बावजूद यात्रा जारी रखने के कारण अमेरिका को उसकी गलतियों की कीमत चुकानी होगी। देखा जाए तो चीन की विस्तारवादी नीतियां साफ दिख रही हैं। ताइवान चीन के लिए संवेदनशील मुद्दा है। यह मुद्दा चीन के लिए ठीक वैसा ही है जैसा कि भारत के लिए जम्मू-कश्मीर। अंतर ये है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और ताइवान स्वायत्त द्वीप है।

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चीन जबरदस्ती ताइवान पर अपना हक जताता रहा है और कुछ ऐसा ही पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर करता है। फिलहाल ताइवान की सरकार भारत के साथ सहयोग बढ़ाना चाहती है। क्योंकि ताइवान की नई पालिसी दक्षिण की ओर देखने वाली है, जिसमें भारत सबसे प्राथमिकता वाला देश है। हालांकि भारत का ताइवान के साथ कोई राजनयिक संबंध नहीं है। लेकिन भारत की ओर से पिछले कुछ वर्षों में ताइवान के साथ बेहतर संबंध बनाने की कोशिश की गई है।

वर्ष 2020 में गलवान में चीन के साथ संघर्ष के बाद से भारत ताइवान को लेकर सक्रिय हो गया। अगस्त 2020 में ताइवान के पूर्व राष्ट्रपति ली टेंग-हुई का निधन हुआ तो भारत ने उनको मिस्टर डेमोक्रेसी कहा। इसे चीन के लिए भारत के एक संदेश के रुप में देखा गया। कुल मिलाकर चीन के साथ तनाव के बीच भारत और ताइवान अपने संबंधों को बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। अब सवाल है कि भारत की राजनयिक नीति पर पेलोसी की यात्रा का क्या असर होगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह यात्रा न केवल अमेरिका के साथ भारत के रक्षा संबंधों को संरक्षित करेगी बल्कि अन्य समझौतों के कार्यान्वयन को भी सुनिश्चित करेगी। क्वाड चीन दादागिरी को खत्म करने के लिए बनाया गया था। इसमें भारत के अलावा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। भारत क्वाड के जरिए भी ताइवान के समर्थन में खड़ा है। ताइवान के जरिए भारत के पास चीन को सबक सिखाने का बेहतरीन अवसर है। भारत को ताइवान के साथ राजनयिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध बढ़ाने चाहिए।

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