अध्यक्ष पद के चुनाव पर बोले राहुल, ‘एक व्यक्ति, एक पद’ संबंधी प्रतिबद्धता बरकरार रहने की उम्मीद

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कोच्चि। कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने के बीच पार्टी नेता राहुल गांधी ने चिंतन शिविर में लिये गये सुधार के फैसलों के अनुरूप ‘‘एक व्यक्ति, एक पद’’ अवधारणा की बृहस्पतिवार को वकालत की और संकेत दिया कि हो सकता है कि वह पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव न लड़ें। गांधी का बयान उन अटकलों के बीच आया है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ सकते हैं।

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केरल के वायनाड से सांसद गांधी ने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि क्या वह अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पिछले संवाददाता सम्मेलन में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। मैंने इसे कई बार दोहराया है।’’ गांधी ने बृहस्पतिवार को कहा कि पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़े जाने संबंधी सवाल का उद्देश्य ‘‘यात्रा से मेरा ध्यान भटकाना है।’’ उन्होंने 3,500 किलोमीटर की कन्याकुमारी-कश्मीर ‘‘भारत जोड़ो यात्रा’’ शुरू की है।

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‘एक व्यक्ति, एक पद’ अवधारणा के मुद्दे पर गांधी ने कहा, ‘‘हमने जो फैसला किया है, जो हमने उदयपुर में तय किया, वो कांग्रेस पार्टी की एक प्रतिबद्धता है। तो मुझे उम्मीद है कि प्रतिबद्धता को बनाए रखा जाएगा।’’ मई में उदयपुर में तीन दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ में पार्टी ने एक पद को एक व्यक्ति तक सीमित करने सहित कई सुधारों का प्रस्ताव रखा था। गांधी की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव में सबसे आगे माने जाने वाले गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर अपने मुख्यमंत्री पद को कथित तौर पर बरकरार रखने की कोशिश कर सकते हैं।

इस बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत केरल पहुंचे। वह गांधी पर पार्टी की बागडोर संभालने के लिए दबाव डाल सकते हैं। गांधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के, दिन के पहले और दूसरे चरण के बीच आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान सवालों के जवाब में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद सिर्फ एक संगठनात्मक पद नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक पद और एक विश्वास प्रणाली है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह उदयपुर चिंतन शिविर में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के फैसले के साथ खड़े रहेंगे तो गांधी ने कहा, ‘‘हमने उदयपुर में जो फैसला किया था, हम उम्मीद करते हैं कि वह प्रतिबद्धता बरकरार रहेगी।’’

गांधी ने कहा कि जो कोई भी कांग्रेस अध्यक्ष बनता है, उन्हें याद रखना चाहिए कि वह विचारों के एक समूह, विश्वास की एक व्यवस्था और भारत के एक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों को सलाह दी, ‘‘आप ऐतिहासिक पद लेने जा रहे हैं। एक ऐसा पद, जो भारत के एक विशेष दृष्टिकोण को परिभाषित करता है और परिभाषित करता भी रहा है।’’ पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के कार्यालयों और अन्य परिसरों पर देशव्यापी छापेमारी पर गांधी ने कहा, ‘‘हर तरह की सांप्रदायिकता का मुकाबला किया जाना चाहिए, चाहे वह कहीं से भी हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सांप्रदायिकता के प्रति ‘कतई बर्दाश्त न करने’ (जीरो टॉलरेंस) की नीति होनी चाहिए और इसका मुकाबला किया जाना चाहिए।’’ ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के लिए उत्तर प्रदेश में अधिक समय न देने के संबंध में आलोचना करने वालों के बारे में पूछे जाने पर गांधी ने कहा, ‘‘इस बारे में चिंता न करें। उत्तर प्रदेश में क्या करने की जरूरत है, इस पर हमारा स्पष्ट दृष्टिकोण है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा देश के एक छोर से दूसरे छोर तक थी और ‘‘सच कहूं तो हम 10,000 किलोमीटर चल नहीं सकते।’’

यात्रा के दौरान गोवा में पार्टी के विधायकों के सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर गांधी ने कहा, ‘‘जैसा कि मैंने पहले भी कई बार कहा है, हम एक ऐसे तंत्र से लड़ रहे हैं जिसने इस देश के संस्थागत ढांचे पर कब्जा कर लिया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम एक ऐसे तंत्र से लड़ रहे हैं जिसके पास असीमित पैसा है, लोगों पर दबाव बनाने की असीमित क्षमता है, लोगों को खरीदने की असीमित क्षमता है, लोगों को धमकाया जा रहा है और इसका नतीजा आपने गोवा में देखा है।’’

केरल में वाम सरकार के बारे में उनकी स्थिति के बारे में पूछे जाने पर गांधी ने कहा कि केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार का मूल्यांकन यहां के कांग्रेस नेताओं द्वारा बेहतर किया जाएगा। उन्होंने हालांकि कहा, ‘‘जहां तक वाममोर्चे की बात है, मेरी उनसे वैचारिक असहमति है।’’ उन्होंने कहा कि यात्रा के साथ चलने वाले लोग बता रहे हैं कि वे वामपंथी सरकार के बारे में क्या सोचते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘बहुत सारे वामपंथी कार्यकर्ता आ रहे हैं और मुझसे हाथ मिला रहे हैं।

वे इस विचार की सराहना करते हैं कि हम क्या कर रहे हैं।’’ भाजपा के खिलाफ एक एकजुट विपक्ष के बारे में पूछे जाने पर गांधी ने कहा, ‘‘सभी विपक्षी दलों के लिए एक साथ आना बहुत महत्वपूर्ण है और इसे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ‘‘विचारधारा और वित्तीय ताकत और संस्थागत ताकत से लड़ने की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि विपक्ष चर्चा करे और रणनीति के साथ आगे आए।’

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