बढ़ता खतरा

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भारत में मंकीपॉक्स धीरे-धीरे पैर पसार रहा है। मंकीपॉक्स से हुई पहली मौत ने चिंता बढ़ा दी है। बीमारी का जोखिम बढ़ गया है। भारत सहित अफ्रीका के बाहर मंकीपॉक्स से चार मौतों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि इस संक्रामक बीमारी से और अधिक मौतें होने की संभावना है। केंद्र सरकार ने संक्रमण के फैलाव पर रोक के लिए सतर्कता बढ़ाई है। एयरपोर्ट, बंदरगाह सभी जगह निगरानी तेज कर दी गई है।

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देश में मंकीपॉक्स के मामलों पर नजर रखने और संक्रमण की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले कदमों के संबंध में निर्णय लेने के लिए एक कार्यबल का गठन किया गया है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी )की ताजा रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 79 देशों में 22485 केस सामने आ चुके हैं। और अफ्रीका सीडीएस की रिपोर्ट के अनुसार 25 जुलाई तक दुनिया में 75 लोगों के मौत मंकीपॉक्स से हो चुकी थी। उसके स्पेन,भारत, ब्राजील में मंकीपॉक्स से एक-एक मौत का मामला सामने आया है।

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वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मौजूदा समय में मृत्यु दर 3-6 फीसदी के बीच है। जबकि ऐतिहासिक स्तर पर मृत्यु दर एक से 11 फीसदी के बीच है। ऐसे में अगर दुनिया के दूसरे देशों से तुलना करें, तो भारत इस बीमारी के मामले में अन्य देशों से बहुत बेहतर स्थिति में है। यानि भारत में अभी मंकीपॉक्स से घबराने की जरूरत नहीं है। पर्याप्त सावधानी बरती जाए तो संभव है कि इस वायरस जन्य बीमारी को काबू में रखते हुए ही इससे मुक्ति पा ली जाए।

कोरोना महामारी के अनुभवों से सीख लेते हुए अस्पतालों का इंतजाम कुछ बेहतर तो हुआ है, पर इस दिशा में अभी बहुत कुछ करना बाकी है। राहत की बात है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) ने एक मरीज के नमूने से मंकीपॉक्स वायरस को अलग कर दिया है, जो बीमारी के खिलाफ जांच किट और टीका विकसित करने में कारगर हो सकता है।

इसी के साथ संस्थान ने संक्रमण की जांच के लिए साजो-सामान तथा विशेष टीका बनाने के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव भी आमंत्रित किया है। चिकित्सा संस्थाएं सचेत हैं तथा सरकार की ओर से कई दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। भारत में इस बीमारी के ज्यादा न फैलने के दूसरे कारण भी हैं। यह बीमारी भी हमें साफ-सफाई के लिए प्रेरित कर रही है। फिर भी राज्य सरकारों को भी मुस्तैद रहना चाहिए तथा आपात स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। संक्रमण के बारे में लोगों को जागरूक करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

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