राजस्थान: राज्यपाल ने CM के सलाहकारों की नियुक्ति पर राज्य सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने राज्य सरकार द्वारा हाल में नियुक्त मुख्यमंत्री के सलाहकारों के संवैधानिक दर्जा के बारे में मुख्य सचिव से जानकारी मांगी है। राजभवन सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल ने इस बारे में विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ द्वारा दिए गए ज्ञापन को मुख्य सचिव को भेजा और इन नियुक्तियों के संवैधानिक दर्जा के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।

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राठौड़ ने अपने ज्ञापन में मुख्यमंत्री के सलाहकारों की नियुक्ति एवं संसदीय सचिवों की संभावित नियुक्ति को संविधान के अनुच्छेद 164 (1 ए), 191 (1) (ए) एवं अनुच्छेद 246 के प्रावधानों तथा उच्चतम न्यायालय एवं आधा दर्जन उच्च न्यायालयों के निर्णयों का उल्लंघन बताया है और कहा है कि राज्य सरकार असंवैधानिक कृत्य कर असंतुष्ट विधायकों को खुश कर रही है।

उन्होंने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के सलाहकारों की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने तथा संसदीय सचिवों की संभावित नियुक्ति नहीं करने की मांग की थी। राज्य सरकार ने रविवार को कांग्रेस विधायक डॉ. जितेंद्र सिंह, राजकुमार शर्मा व दानिश अबरार तथा निर्दलीय विधायक बाबूलाल नागर, संयम लोढ़ा, रामकेश मीणा को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया। राज्य सरकार द्वारा 15 विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने की भी संभावना है।

इससे पहले गहलोत मंत्रिपरिषद के पुनर्गठन के तहत 15 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी जिनमें तीन मौजूदा मंत्रियों को राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री बनाया गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन सलाहकारों के साथ पहली बैठक बुधवार रात की। वहीं, राठौड़ ने बुधवार को ट्वीट किया कि संविधान के तमाम प्रावधानों के प्रतिकूल मात्र पार्टी में उभरते हुए असंतोष को दबाने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छह विधायकों को उपकृत करते हुए सलाहकार के पद पर नियुक्त किया है।

लेकिन प्रावधानों के मुताबिक किसी भी विधायक को लाभ के पद से नवाजा नहीं जा सकता है। उन्होंने लिखा कि अंतर्कलह से जूझती कांग्रेस सरकार विधायकों को प्रलोभन देकर खुश करना चाह रही है। महामहिम राज्यपाल महोदय को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने मुख्यमंत्री सलाहकारों की नियुक्ति एवं संसदीय सचिवों की संभावित नियुक्ति के संबंध में मेरे पत्र पर संज्ञान लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

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