भारत को वैश्विक चिकित्सा केंद्र बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मनसुख मांडविया

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नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने भारत को वैश्विक चिकित्सा केंद्र बनाने की प्रतिबद्ध व्यक्त करते हुए गुरुवार को कहा कि देश में अपना इलाज कराने के इच्छुक लोगों की आवश्यकताओं के लिए एक पोर्टल बनाया जा रहा है। श्री मांडविया ने यहां ‘ब्रांड इंडिया’ की स्थापना के लिए भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों के एक गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जो विदेशी लोग भारत में अपना इलाज करना चाहते हैं, उनके लिए विश्वसनीय जानकारी की सुविधा और आसानी के लिए एक ‘वन स्टेप’ पोर्टल बनाया जा रहा है।

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उन्होेंने कहा कि भारत अपने स्वास्थ्य सेवा तंत्र और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के साथ पूरी दुनिया के लिए एक आकर्षण बन गया है। उन्होंने कहा, आज दुनिया के अलग-अलग देशों से लोग बड़ी संख्या में इलाज के लिए भारत आ रहे हैं। चिकित्सा पर्यटन को और बढ़ावा देने के उद्देश्य से, सरकार ने ‘हील इन इंडिया’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसी तरह ‘हील बाय इंडिया’ कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। यह भारतीय चिकित्सा कर्मचारियों को दुनिया भर में यात्रा करने और एक स्वस्थ वैश्विक समाज की दिशा में योगदान करने का अवसर प्रदान करेगा।

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उन्होंने कहा, हम अपने पारंपरिक चिकित्सा उद्योग को और मजबूत करके और ‘हील इन इंडिया’ और ‘हील बाय इंडिया’ पहल को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक चिकित्सा केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। चिकित्सा पर्यटन को और मजबूत करने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की चिकित्सा यात्रा करने के इच्छुक लोगों के लिए दुनिया भर में भारतीय दूतावासों में सुविधा केंद्र स्थापित किये जाने चाहिए।

इसके अलावा, भारत में इलाज करा रहे लोगों की प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए एक एक प्रणाली स्थापित की जा सकती है। इससे चिकित्सा पर्यटन को ‘ब्रांड इंडिया’ बनाने में मदद मिलेगी। चिकित्सा क्षेत्र में अन्य देशों के साथ समझौते करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मांडविया ने कहा कि कुशल नर्स उपलब्ध कराने के लिए जापान के साथ हमारा समझौता है। कुशल चिकित्सा श्रमबल के लिए अन्य देशों के साथ भी इस तरह के समझौते किए गए हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार की संभावनाओं का पता लगाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत ने खुद को आयुष के केंद्र के रूप में स्थापित किया है। हाल ही में, ‘आयुष चिह्न’ जारी करने की घोषणा की गयी। यह भारत में आयुष उत्पादों को प्रामाणिकता प्रदान करेगा और पारंपरिक चिकित्सा उद्योग को बढ़ावा देगा। आयुर्वेद उपचार के लिए दूसरे देशों से भारत आने वालों के लिए एक विशेष वीजा श्रेणी बनाई गई है। आयुर्वेद उपचार कराने के लिए 165 देशों के साथ ‘मेडिकल वीजा’ और ‘मेडिकल अटेंडेंट वीजा’ का प्रावधान किया गया है।

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