World Hepatitis Day पर विशेषज्ञों ने रखी राय, बोले- हेपेटाइटिस की समय पर पहचान ही बचायेगी जान

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लखनऊ। देश में हर साल करीब दो लाख लोगों की मौत हेपेटाइटिस से हो जाती है। एक तरफ जहां एचआईवी, टीबी, मलेरिया जैसे संक्रमण से होने वाली मौतों में धीरे–धीरे गिरावट देखी जा रही है, वहीं हेपेटाइटिस से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। यही वजह है कि सरकार हेपेटाइटिस के रोकथाम के लिए लगातार प्रयास कर रही है। यह कहना है केजीएमयू के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.सुमित रूंगटा का।

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उन्होंने यह बातें गुरुवार को एसजीपीजीआई में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर आयोजित जागरुकता कार्यक्रम के दौरान कहीं। यह कार्यक्रम एसजीपीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग व केजीएमयू के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया था। इसके अलावा इस कार्यक्रम के आयोजन में स्टेट आर्गन व टिश्यु ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन ने भी सहयोग किया। प्रो.सुमित रूंगटा ने बताया कि सरकार का पूरा फोकस हेपेटाइटिस से होने वाले मृत्युदर को रोकने व इस बीमारी को जड़ से समाप्त करने में है।

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उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष करीब दो लाख लोगों की मौत हेपेटाइटिस से हो जा रही है। उसमें से 90 प्रतिशत मौतें हेपेटाइटिस- बी व सी की वजह से होती है। जबकि बी व सी से होने वाली मौतों का समुचित इलाज उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि सही समय पर हेपेटाइटिस बीमारी का पता लग जाये व इलाज किया जाये, तो इससे होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश में करीब 70 लाख लोग हेपेटाइटिस- सी से पीड़ित हैं। वहीं हेपेटाइटिस-बी से करीब दो करोड़ लोग पीड़ित हैं। इस रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या को देखते हुये इसका इलाज करना जरूरी है।

क्या है पंजाब मॉडल जो बाद में बना नेशनल प्रोग्राम

एक समय था जब हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों को इलाज कराने के लिए बड़े संस्थानों का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब सरकार ने ऐसा कार्यक्रम बनाया है,जिसके तहत बिशेषज्ञ चिकित्सक, जिला अस्पताल सीएचसी,पीएचसी में तैनात चिकित्सकों को इस बीमारी के इलाज की जानकारी व प्रशिक्षण देते हैं, उन्हें हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों के इलाज के गुर सिखाते हैं।

सबसे पहले इस तरह का कार्यक्रम पंजाब में चलाया गया था,इस कार्यक्रम को प्रो.आर.के.धीमान ने पीजीआई चंडीगढ़ में रहते हुये शुरू कराया था। उसके बाद इस मॉडल को साल 2018 में पूरे देश में लागू किया गया। आज इसी बिषय पर एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो.आर.के.धीमान ने लोगों को संबोधित किया। मौजूदा समय में नेशनल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के नाम से इस कार्यक्रम को चलाया जा रहा है। जिसका एक मात्र उद्देश्य हेपेटाइटिस बीमारी की रोकथाम करना है।

सब मिलकर करें काम,तब लगेगा हेपेटाइटिस पर लगाम

केजीएमयू के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी युनिट के एडिशनल प्रो.अजय कुमार पटवा ने बताया कि भारत में हेपेटाइटिस – बी करीब एक प्रतिशत है,जबकि हेपेटाइटिस – सी .8 प्रतिशत है। एक हजार में करीब आठ लोग हेपेटाइटिस- सी बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी की बहुत अच्छी दवाईयां मौजूद हैं,उसके बाद भी इस बीमार को पूरी तरह से रोकने में करीब 10 से 15 वर्ष का समय लगेगा।

वह भी तब जब हेपेटाइटिस के खात्में को लेकर सरकार से लेकर जनता तक एक साथ प्रयास करे। यदि इस बीच में जागरुकता कार्यक्रमों में कमी आई तो मरीजों की संख्या बढ़ती जायेगी। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी व सी के इलाज के लिए बहुत ही बेहतरीन दवाईयां मौजूद हैं। इसके लिए सरकार ने नेशनल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम चला रखा है। जिसके तहत नि:शुल्क दवाईयां भी दी जा रही हैं।

हेपेटाइटिस- डे

स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांटेशन ऑर्गनाइजेशन के नोडल अधिकारी व एसजीपीजीआई अस्पताल प्रशासन के विभागाध्यक्ष प्रो.राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि हर साल हेपेटाइटिस- डे की एक थीम निर्धारित की जाती है। थीम के पीछे का मकसद यह होता है कि लोग हेपेटाइटिस जैसी बीमारी को लेकर सर्तक हों और स्वयं से सावधानी बरतें, ताकि आने वाले सालों में इस बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके। इसके रोकथाम के लिए सरकार ने कार्य योजना बनाई है। जिसके तहत करीब आठ बिन्दुओं को निर्धारित किया गया है,जिस पर जिम्मेदारों को कार्रवाई करनी है। इसमें स्क्रीनिंग,टीका,ट्रीटमेंट तक के कार्यक्रम शामिल किये गये हैं।

हेपेटाइटिस वायरस

हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई पांच प्रकार का होता है। हेपेटाइटिस बी और सी करोड़ों लोगों में बीमारी का कारण बनते हैं। यही लिवर सिरोसिस और कैंसर का सबसे बड़ा कारण भी हैं।

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