अंशाति की सजा

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में हुई वृद्धि चिंता बढ़ाती हैं। सीमापार से घुसपैठ जारी है। क्या एक बार फिर कश्मीर घाटी में आतंकवाद लौट रहा है? सोमवार तड़के पुंछ जिले के सुरनकोट इलाके में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक जेसीओ सहित पांच सैन्य कर्मी शहीद हो गए। भारतीय सेना आतंवादियों का लगातार मुंह तोड़ जवाब दे रही है। आतंकी सेना के डर के आगे अब वहां के आम लोगों को भी निशाना बना रहे हैं।

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पिछले कुछ दिनों में कम से कम सात नागरिक आतंकवादी हमलों का शिकार हुए हैं, इस साल यह आंकड़ा 28 को छू गया है। मारे गए 28 लोगों में से पांच व्यक्ति स्थानीय हिंदू या सिख समुदायों के थे और दो गैर-स्थानीय हिंदू मजदूर थे। लक्षित हत्याएं आतंकवादियों की रणनीति में बदलाव का संकेत देती हैं। यह प्रासंगिक है कि जो शहीद हुए हैं, वे मुख्य रूप से सिख और हिंदू जैसे अल्पसंख्यक समुदायों के थे। यह बहुलवाद और समायोजन के केंद्र में देश के विरोधियों की ओर से सोची-समझी चाल है।

ऐसा माना जाता है कि इनमें से कई हमले फेसलेस कैडर द्वारा किए गए हैं, जिससे अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो गया है। इसमें किसी को संदेह नहीं कि ये अलगाववादी पाकिस्तान समर्थित हैं। जानकारों के अनुसार कश्मीर घाटी में आतंकवादी जो कर रहे हैं उससे स्पष्ट है कि वे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर और उन्हें पलायन पर विवश करके 1990 को दोहराना चाहते हैं।

यह सही है कि अनुच्छेद 370 और 35-ए को निष्प्राण करके और राज्य का पुनर्गठन करके केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया और युगांतरकारी कदम उठाया था। यह सच है कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के मद्देनजर भारी सैन्य उपस्थिति ने बड़े आतंकी हमलों को रोका। लेकिन अनुच्छेद 370 और 35-ए को निरस्त करने के बाद जो अनिवार्य कदम केंद्र सरकार को उठाने चाहिए थे, उनके प्रति अभी तक कोई रुचि न दिखाकर गलत किया है। कोई ढांचागत बदलाव नहीं है।

सरकार को इस मुद्दे पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। रक्षा सूत्रों का कहना है कि घाटी में आग्नेयास्त्रों की आमद भी हुई है। बीते वर्ष से ड्रोन लगातार गिराए जा रहे हैं। हालांकि जम्मू कश्मीर में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमलों के मद्देनजर सुरक्षा बलों ने देश विरोधी असामाजिक तत्वों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। सुरक्षा तंत्र को भी चुनौतियों के बदलते स्वरूप का सामना करने के लिए बेहतर तैयारी के साथ सजग रहना होगा। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।

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