बड़ी समस्या

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बेरोजगारी दर का बढ़ता ग्राफ बड़ी समस्या है। जबकि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। साथ ही प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत में बेरोजगार लोगों की संख्या भी सबसे अधिक है। भारत में रोजगार वृद्धि जनसंख्या वृद्धि के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है, यह अर्थव्यवस्था में भी विकास दर से मेल नहीं खा रही है।

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संयुक्त राष्ट्र  के मुताबिक अगले साल भारत जनसंख्या के मामले में चीन से आगे निकल जाएगा और दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने में देश में बेरोजगारी की दर नई ऊंचाई को छूते हुए 8.3 फीसदी पर पहुंच गई। जो बीते 12 महीनों की दरों की तुलना में सर्वाधिक थी। बेरोजगारी दर का बढ़ना यह प्रदर्शित करता है कि जब लोगों की नौकरी की चाहत बढ़ी तो अर्थव्यवस्था उन्हें उचित नौकरी मुहैया कराने में असमर्थ रही।

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भारत में रोज़गार संकट के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। निजीकरण, पारंपरिक सफेदपोश रोजगार निर्माण में ठहराव, आईटी नौकरियां और ई-कॉमर्स नौकरियां स्थिर रह रही हैं, नई प्रौद्योगिकियों का विकास जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता  आईटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर स्वचालन की ओर बढ़ने का संकेत दे रही है जिससे नौकरियां घट रही हैं; न केवल आईटी क्षेत्र में बल्कि विनिर्माण आदि में भी डिजिटलीकरण का प्रसार बढ़ रहा है। रोजगार के क्षेत्र में चिंता की बात पिछले माह वेतनभोगी नौकरियों का 47 लाख कम होना है।

जुलाई में वेतनभोगी नौकरियां 8.08 करोड़ थीं जो अगस्त में 5.8 प्रतिशत गिरकर 7.62 करोड़ हो गई थीं। भारत का मानव श्रम बल अगस्त में 40 लाख बढ़कर 43 करोड़ पर पहुंच गया। यह दिखाता है कि रोजगार की मांग में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में सवाल है कि जब देश में जीएसटी संग्रह नई ऊंचाइयां छू रहा है और देश के उत्पादन में वृद्धि हो रही है तो देश में बेरोजगारी कम होने की बजाय क्यों बढ़ रही है। मानव श्रम बल की सहभागिता की दर जुलाई में 38.95 फीसदी थी जो अगस्त में बढ़कर 39.24 फीसदी हो गई थी।

श्रम बल की सहभागिता दर का 30 दिन का मूविंग एवरेज (डीएमए)  अगस्त में उच्च स्तर 39.4 फीसदी पर पहुंच गया था। इसके बाद गिरावट का दौर शुरू हो गया और पिछले सप्ताह 11 सितंबर को 39.1 फीसदी हो गया था। सितंबर के शुरुआती दिनों में बेरोजगारी दर का गिरना श्रम बल की सहभागिता दर में गिरावट के साथ रोजगार बढ़ने को भी दर्शाता है। यह बदलाव स्वागत योग्य है।

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