बरेली: न्यू भारत अस्पताल में टेक्नीशियन की मौत पर हंगामा

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अमृत विचार, बरेली। पीलीभीत रोड पर स्थित न्यू भारत अस्पताल में मंगलवार को ओटी टेक्नीशियन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर हत्या का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। मामले में हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने को बारादरी थाने में तहरीर दी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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चनहेटी के दिलीप कुमार (42) न्यू भारत अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन के पद पर तैनात थे। परिजनों के अनुसार वह रोज की तरह सोमवार रात करीब आठ बजे घर से खाना खाकर अस्पताल ड्यूटी के लिए निकले थे। रात बारह बजे पत्नी छाया ने उन्हें किसी कार्य के चलते फोन किया तो बात हुई। घर आने से पहले वह पत्नी को फोन करते थे, लेकिन मंगलवार सुबह जब फोन नहीं आया तो पत्नी ने उन्हें फोन किया लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। कई बार कॉल की मगर फोन नहीं उठा। पत्नी ससुर रामबहादुर के साथ अस्पताल पहुंचीं। वहां पति का शव ओटी के बाहर फर्श पर पड़ा था। शव को देख वह बेहोश हो गईं। स्टाफ अस्पताल से फरार था। चीख पुकार सुन मौके पर भीड़ एकत्र हो गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर हत्या का आरोप लगाया।

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बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था अस्पताल
न्यू भारत हॉस्पिटल का संचालन आठ मई से शुरू हुआ है। तब से दिलीप यहां ओटी टेक्नीशियन के पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। दिलीप की मौत के बाद परिजनों ने मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में शिकायत की। इस पर टीम ने छापेमारी की तो पता चला कि अस्पताल का पंजीयन विभाग में नहीं है। वहीं, अस्पताल में फायर एनओसी के साथ ही बॉयो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण का भी कोई इंतजाम नहीं है। 14 स्टाफ वाला अस्पताल किराये के भवन में संचालित हो रहा था।

इकलौते बेटे की मौत से पिता बदहवास
घर में जब जवान बेटे की मौत हो जाए तो पिता के सिर पर दुखों का पहाड़ टूटने जैसा है। दिलीप के पिता सुबह अस्पताल पहुंचे तो अपने बेटे का शव देख बदहवास हो गए। जो भी लोग उन्हें ढाढस बंधा रहे थे, उनसे इतना ही कहे रहे थे कि मेरे घर का चिराग बुझ गया, अब मैं क्या करुंगा। उन्होंने बताया कि दिलीप की शादी को 10 साल हुए थे। दिलीप के एक बेटा प्रिंस और बेटी दिव्या है।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
दिलीप रोज की तरह ड्यूटी पर आए थे। रात में जो स्टाफ था, उनके साथ जो कर्मी थे, उन्होंने तबीयत खराब होने की कोई जानकारी नहीं दी। सुबह ही दिलीप की मौत की सूचना पर यहां पहुंचे हैं। किसी भी प्रकार की कोई रंजिश और विवाद भी नहीं था।

डॉ. हरपाल सिंह, एसीएमओ प्रशासन-
मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर जांच करने गए थे। अस्पताल का पंजीयन भी नहीं हुआ है। जांच के दौरान कोई डॉक्टर और स्टाफ वहां मौजूद नहीं मिला। हालांकि, अग्रिम कार्रवाई तक अस्पताल को बंद करा दिया गया है।

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