बरेली: 150 साल पुरानी रामलीला की रामबरात निकालने पर पुलिस का अड़ंगा

बरेली, अमृत विचार। इस बार रामलीला और परंपरागत रामबरात व शोभायात्रा निकालने के संबंध में शासन से गाइडलाइन नहीं आयी तो जिला प्रशासन ने भी इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की। रामलीलाएं कराने के लिए तो संगठनों को अनुमति मिल गयी लेकिन रामबरात निकालने के लिए अनुमति नहीं मिली। इसलिए शहर में दो रामलीला कमेटी से जुड़े लोगों ने बिना अनुमति के ही रामबरात निकाली। तब पुलिस प्रशासन ने कोई रोकटोक नहीं की।

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आंवला तहसील के ग्राम शिवपुरी में भी 150 साल पुरानी रामलीला होने के साथ रामबरात निकालने की परंपरा है। रामलीला की अनुमति मिल गयी लेकिन रामबरात निकालने की अनुमति देने के लिए पुलिस ने मामला फंसा दिया है। सिरौली पुलिस पर रामबरात निकालने पर समिति के पदाधिकारियों को जेल भेजने की चेतावनी देने का आरोप लगाया गया है।

रामबरात की अनुमति लेने के संबंध में बुधवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक के अमित शर्मा ‘मोनू’ के साथ हिंदू जागरण मंच के जिला अध्यक्ष अरुण कुमार फौजी, प्रांतीय विधि प्रमुख प्रतिपाल सिंह, जिला विधि प्रमुख गौरव सिंह राठौर, महामंत्री जयदीप पाराशरी कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी नितीश कुमार से मिले। इस दौरान एसएसपी रोहित सिंह सजवाण भी जिलाधिकारी के कक्ष में मिल गए।

सभी पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपकर बताया कि तहसील आंवला के ग्राम शिवपुरी में 150 वर्ष पुरानी रामलीला की रामबरात निकाली जाती है। पुलिस प्रशासन द्वारा यह कहकर रामबरात को रोका गया है कि यदि शोभायात्रा का आयोजन किया गया तो कमेटी के पदाधिकारी जेल जाने को तैयार रहें। यह आस्था पर प्रहार है, जिसको लेकर क्षेत्रवासियों में रोष व्याप्त है। उप जिलाधिकारी आंवला ने अनुमति दे दी लेकिन कोरोना नियमों का हवाला देते हुए सिरौली पुलिस इसे रोक रही है।

पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से भव्य रामबारात एवं शोभायात्रा निकालने की अनुमति प्रदान करने की मांग की। अमित शर्मा के अनुसार डीएम बोले-परंपरा है तो रामबरात निकलने दी जाएगी। नयी परंपरा शुरू करने नहीं दी जाएगी। एलआईयू व तहसील टीम को पड़ताल कर आख्या देने के निर्देश दिए हैं। रामबरात निकलने का रास्ता साफ हो गया है।

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