बरेली: मुरादाबाद रेल मंडल में लागू होगी ई-आक्शन व्यवस्था

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अमृत विचार, बरेली। रेल प्रशासन अपनी कई प्रकार की सेवाओं को प्राइवेट हाथों में देकर ठेके पर संचालित करता है। जिसके लिए टेंडर निकालकर लोगों को ठेका दिया जाता है। मौजूदा व्यवस्था में बंद लिफाफे के अंदर क्रेता निविदा के लिए आवेदन करता है। मगर रेल प्रशासन अब ई-आक्शन ( ई- नीलामी) प्रक्रिया अपनाने जा रहा है। बीते दिनों देश के 11 मंडलों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर लागू किया था मगर अब मुरादाबाद मंडल में भी इसे शुरू करने की तैयारी है।

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मुरादाबाद मंडल के अधिकारियों के मुताबिक इस प्रक्रिया से होने वाले फायदों की बात करें तो विक्रेता अपने क्रेताओं को आनलाइन बोली के लिए आमंत्रित करेगा। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे समय की बचत भी होगी, न्यूनतम समय में आक्शन कार्य पूरा किया जा सकेगा और पारदर्शिता होने के कारण आपसी विश्वास बढ़ेगा। मौजूदा प्रक्रिया की बात करें तो टेंडर बंद लिफाफे में भेजे जाते हैं। जिसमें टेंडर जमा करने से लेकर फाइनल होने तक की अलग-अलग तिथियां होती हैं। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है। मगर ई-आक्शन के जरिए क्रेता आनलाइन बोली लगा सकता है। नीलामी की बोली का मूल्य भी हर कोई आनलाइन देख सकता है। जबकि बंद लिफाफे में यह मुमकिन नहीं था। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो जाएगी।

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कहीं भी बैठकर लगा सकेंगे बोली
ई-आक्शन के जरिए क्रेताओं को आमंत्रित करने का दायरा भी बढ़ जाएगा। पहले निविदा की प्रक्रिया के लिए क्रेता को मंडल में आना पड़ता था। मगर अब किसी भी शहर में बैठकर बोली लगाई जा सकती है। इससे रेलवे विभाग को अधिक से अधिक क्रेताओं को आमंत्रित करना आसान होगा, बल्कि प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

टैक्सी स्टैंड और शौचालय के लिए होगा ई-आक्शन
मौजूदा समय में बरेली जंक्शन पर शौचालय और भोजनालय जैसे तमाम छोटी-छोटी व्यवस्थाओं के लिए ठेके खाली पड़े हैं। इसके लिए रेल प्रशासन को ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं। ठेकेदार मिलता भी है तो मामला कागजी कार्रवाई में लटक जाता है। मगर अब बरेली जंक्शन पर टैक्सी स्टैंड, स्टाल, शौचालय, कार पार्किंग जैसी व्यवस्थाओं का ई-आक्शन किया जाएगा।

सुधीर सिंह, सीनियर डीसीएम, मुरादाबाद मंडल-
मुरादाबाद मंडल में भी जल्द ही ई-आक्शन की प्रक्रिया लागू करने की तैयारी चल रही है। जिससे न सिर्फ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि ठेका व्यवस्था में भी पारदर्शिता आएगी। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश के 11 मंडलों में यह व्यवस्था की गई है।

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