उत्तराखंड में बारिश का कहर, 39 घंटे में 43 लोगों की मौत

देहरादून, अमृत विचार। पहाड़ों में हो रही मूसलाधार बारिश से नदी- नाले उफना गए हैं। रविवार  से शुरू हुई बारिश ने मंगलवार दोपहर तक कुमाऊं के छह जिलों में 43 लोगों की जिंदगी लील ली। नैनीताल जिले में सर्वाधिक 29 लोगों की जानें चली गईं। अल्मोड़ा में 06, बागेश्वर, पिथौरागढ़, बागेश्वर और उधमसिंह नगर में एक-एक, पौड़ी और चंपावत जिले में छह लोगों की जिंदगी लील ली। सोमवार सुबह अल्मोड़ा में मलबे में दबकर चार लोगों, मुक्तेश्वर में पांच, गरमपानी में दो और बाजपुर में एक व्यक्ति की मौत हो गई। पहाड़ी जिलों में बारिश के बाद जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उसे देखकर मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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रामनगर में कोसी नदी उफान पर।

मंगलवार सुबह रामगढ़ में बादल फटने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें घटनास्थल को रवाना हुईं।

रामनगर के रिसोर्ट के बाहर पानी भरने से पर्यटकों की कार डूब गई।

इधर, रामनगर कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर 146300 क्यूसेक तक पहुंच गया। उफनाई कोसी का पानी देर रात मोहान स्थित लेमन ट्री रिसोर्ट के अलावा कई रिसोर्ट में घुस गया। जहां खड़ी पर्यटकों की कारें पानी में डूबी नजर आईं। लेमन ट्री में लगभग 100 पर्यटक अभी भी फंसे हैं। हालांकि दोपहर तक कोसी का जलस्तर 76 हजार क्यूसेक पहुंचने के बाद पर्यटकों ने राहत की सांस ली। नैनीताल में मूसलाधार बारिश के चलते झील का पानी माल रोड पर बहने लगा। नैना देवी मंदिर परिसर नैनी झील के पानी से लबालब हो गया।

हल्द्वानी में गौला नदी उफान पर।

रामनगर के पास चुकुम गांव में तीन मकान बहने की खबर है। हालांकि अभी तक जनहानि की कोई सूचना नही है। प्रशासन ने कोसी बैराज पुल पर वाहनों के साथ ही पैदल आवाजाही बंद कर दी है और मैदानी क्षेत्रों में लगातार संपर्क साधा जा रहा है। मैदानी क्षेत्रों में कोसी नदी के पास में रह रहे लोगों को वहां से सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। अगर अधिशासी अभियंता कैलाश उनियाल ने बताया कि दोपहर एक बजे जलस्तर 76 हजार क्यूसेक पहुंच गया, यह राहत की बात है। सिंचाई विभाग के सभी अधिकारी कोसी बैराज पर तैनात हैं। स्थिति पर नजर बनाए हैं।

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